बेटी की विदाई पर क्यों दिया जाता है खोइछा? पंडित जी से जानिए हर चीज़ के पीछे छिपा गहरा मतलब
शादी सिर्फ दो लोगों का साथ नहीं होता, यह दो परिवारों का रिश्ता भी बनाता है और जब बात बेटी की विदाई की आती है, तो हर आंख नम हो जाती है. लेकिन इस भावुक मौके पर एक रस्म होती है जो बेटी को सिर्फ चीजें नहीं देती, बल्कि उसके नए जीवन के लिए ढेरों आशीर्वाद साथ भेजती है. इस रस्म को खोइछा कहा जाता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
बिहार समेत पूर्वी भारत के कई इलाकों में यह परंपरा बहुत मायने रखती है. जब बेटी अपने ससुराल के लिए रवाना होने लगती है, तो मां या घर की कोई बड़ी महिला उसकी गोद में चुनरी या साड़ी का पल्लू फैलाकर उसमें कुछ चीजें डालती है. इसे खोइछा देना कहते हैं. माना जाता है कि इसमें जो भी रखा जाता है, उसका जुड़ाव बेटी के आने वाले जीवन से होता है. आइए जानते हैं, खोइछा में क्या-क्या रखा जाता है और क्यों.
हल्दी की गांठ – नए जीवन के लिए शुभ शुरुआत
हल्दी को हमेशा से ही शुभ माना गया है. यह न सिर्फ शरीर को साफ रखने वाली चीज़ है, बल्कि इसे सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है. जब मां अपनी बेटी के खोइछा में साबुत हल्दी की गांठ रखती है, तो यह इशारा होता है कि उसका जीवन हमेशा सकारात्मक और ऊर्जा से भरा रहे. यह बुरी नजर से भी बचाव करती है.
दूर्वा घास – रिश्ते की हरी-भरी उम्र
दूर्वा घास को गणेश जी को अर्पित किया जाता है, और यह शुभ मानी जाती है. जब इसे खोइछा में रखा जाता है, तो इसका मतलब होता है कि बेटी का वैवाहिक जीवन हमेशा हरा-भरा, खुशहाल और स्थिर बना रहे. यह एक तरह से प्रेम और अपनापन बनाए रखने का प्रतीक होता है.
कुमकुम – रिश्तों में रंग भरने वाला संकेत
कुमकुम सिर्फ सजने-संवरने की चीज़ नहीं, बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. जब खोइछा में इसे रखा जाता है, तो यह दुआ होती है कि बेटी के रिश्ते हमेशा मजबूत रहें और उसका वैवाहिक जीवन रंगों से भरा हो.
चावल और पैसे – सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
चावल को समृद्धि और स्थिरता से जोड़ा जाता है. जब मां बेटी के खोइछा में चावल रखती है, तो वह उसके जीवन में बरकत की कामना करती है. साथ में कुछ पैसे भी रखे जाते हैं, ताकि बेटी के नए घर में कभी आर्थिक तंगी न हो और उसका जीवन सदा भरा-पूरा बना रहे.

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