रतनपुर गांव में हिन्दू सम्मेलन स्थल का हुआ भूमि पूजन, 150 ट्रैक्टरों के साथ निकाली रैली
-4 जनवरी को रतनपुर में आयोजित होगा भव्य हिन्दू सम्मेलन
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
रविवार को रतनपुर गिरधारी गांव में 4 जनवरी को होने वाले हिन्दू सम्मेलन की तैयारियों को लेकर भूमि पूजन किया गया। जिसमें 150 ट्रैक्टरों के साथ वाहन रैली का आयोजन बड़े स्तर पर किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिला रायसेन खण्ड सांची के मंडल मेढ़की तिजालपुर के ग्राम रतनपुर गिरधारी में होगा। रविवार को भूमिपूजन कार्यक्रम में ग्राम बरौला, बराई खास, तिजालपुर , खामखेड़ा, रतनपुर, मेढ़की, कटसारी, भोई कालोनी, भगवंतपुर, बहेडिया, पगनेश्वर के लगभग 150 ट्रैक्टरों के साथ वाहन रैली निकाली गई । तदोपरांत भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ । कार्यक्रम में पूज्य संत आयोजन समिति के सभी पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित रहे।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रेमसिंह धाकड़ विभाग प्रचार प्रमुख ने अपने उद्बोधन में बताया कि आज की यह पावन बेला, यह गूंजता हुआ शंखनाद और आप सबके चेहरों पर झलकता यह उत्साह इस बात का प्रमाण है कि आज हम केवल एक कार्यक्रम की नींव नहीं रख रहे, बल्कि हम अपने सांस्कृतिक पुनरुत्थान के एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। इस पवित्र भूमि का पूजन करते हुए मुझे रामायण का वह ऐतिहासिक प्रसंग याद आ रहा है, जब विशाल समुद्र के तट पर पूरी वानर सेना असमंजस में बैठी थी। हर कोई चुप था, हर कोई सहमा था। यहाँ तक कि स्वयं महावीर हनुमान जी भी चुपचाप एक कोने में बैठे थे। उनके पास असीम बल था, वो उड़ सकते थे, वो पर्वतों को उठा सकते थे, लेकिन उस क्षण वो अपनी ही शक्तियों को भूल चुके थे। तब जामवंत जी ने आगे बढ़कर उन्हें झकझोरा और याद दिलाया। का चुप साधि रहा बलवाना। पवन तनय बल पवन समाना।
हम जाति-पाति के छोटे दायरों से ऊपर उठकर 'केवल हिंदू' बनकर जिएंगे--मेरे भाइयों और बहनों, आज वही स्थिति हमारे हिंदू समाज की है। हम हनुमान जी की तरह अपनी शक्ति भूल बैठे हैं जिसने पूरी दुनिया को सभ्यता, संस्कार और विज्ञान का पाठ पढ़ाया। हम भूल गए हैं कि हम उन महापुरुषों की संतान हैं जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी, लेकिन कभी शीश नहीं झुकाया। आज हमें भी एक 'जामवंत' की जरूरत है जो हमें हमारी एकता और हमारे पराक्रम की याद दिला सके।यह हिंदू सम्मेलन वही 'जामवंत' है। यह सम्मेलन आपको याद दिलाने आया है कि, आप महा पराक्रमी हैं। आप बिखरे हुए तिनके नहीं, आप एक अटूट जंजीर हैं। जिस तरह जामवंत के याद दिलाते ही हनुमान जी ने हुंकार भरी थी और एक छलांग में समंदर लांघ दिया था, ठीक उसी तरह आज इस भूमि पूजन के साक्षी बन रहे आप सभी को जागना होगा।
हमें संकल्प लेना होगा कि: हम जाति-पाति के छोटे दायरों से ऊपर उठकर 'केवल हिंदू' बनकर जिएंगे।हम अपनी संस्कृति और मर्यादाओं की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। हम आने वाली पीढ़ियों को यह गर्व करना सिखाएंगे कि हिंदू होना सौभाग्य की बात है। आज इस भूमि पर किया गया यह पूजन केवल एक औपचारिक अनुष्ठान नहीं है, यह हमारे संगठित होने का शंखनाद है। आइए, अपने भीतर के उस 'हनुमान' को जगाएं और पूरी दुनिया को बता दें कि हिंदू समाज अब जाग चुका है।

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