लंका जाते-जाते देवघर में क्यों रुक गए शिव? बैद्यनाथ धाम की स्थापना की रहस्यमयी गाथा
बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी केवल धार्मिक कथा नहीं है, बल्कि यह अटूट भक्ति, अहंकार और दैवीय न्याय का एक दिलचस्प संगम है। झारखंड के देवघर में स्थित यह ज्योतिर्लिंग कामना लिंग के रूप में जाना जाता है। कहानी की शुरुआत लंकापति रावण से होती है। रावण भगवान शिव का परम भक्त था, लेकिन उसके भीतर अपनी शक्ति को लेकर अहंकार आ गया था। वह चाहता था कि महादेव लंका में स्थायी रूप से निवास करें ताकि उसकी लंका अजेय बन जाए।
शिव पुराण की कथाओं में उल्लेख मिलता है कि रावण ने हिमालय पर घोर तपस्या की और प्रसन्न करने के लिए एक-एक करके अपने नौ सिर काट दिए। जब वह अपना दसवां सिर काटने वाला था, तब महादेव प्रकट हुए और उस वरदान मांगने को कहा। इस पर रावण ने महादेव से लंका चलने का आग्रह किया। शिवजी तैयार हो गए, लेकिन उन्होंने एक अटूट शर्त रख दी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शिवजी ने रावण को एक लिंग स्वरूप दिया और कहा, तुम इस लेकर जा सकते हो, लेकिन याद रखना, लंका पहुंचने से पहले अगर तुमने इस लिंग स्वरूप कहीं भी जमीन पर रखा, तब वहां वहीं स्थापित हो जाएगा और फिर इस कोई नहीं हिला पाएगा।
जब रावण शिवलिंग लेकर चला, तब स्वर्ग में हलचल मच गई। देवताओं को डर था कि अगर शिवजी लंका चले गए, तब रावण को हराना असंभव होगा। तब भगवान विष्णु ने एक लीला रची। उन्होंने वरुण देव (जल के देवता) की मदद से रावण के पेट में इतनी लघुशंका भर दी कि वह बेचैन हो उठा। ठीक उसी समय, विष्णु जी एक साधारण चरवाहे (बैजू) का रूप धारण कर वहां प्रकट हो गए। रावण ने उस चरवाहे को बुलाया और कुछ देर के लिए शिवलिंग पकड़ने को कहा। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार जैसे ही रावण शिवलिंग सौंपकर गया, चरवाहे ने (जो स्वयं भगवान विष्णु थे) शिवलिंग को जमीन पर रख दिया।
जब रावण वापस आया, तब देखा कि शिवलिंग जमीन से चिपक चुका था। उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन महादेव अपनी शर्त के अनुसार वहीं स्थिर हो गए। रावण को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हार मानकर रावण ने अंगूठे से शिवलिंग को नीचे की ओर दबा दिया और वहां से चला गया। जिस चरवाहे बैजू के नाम पर यह स्थान प्रसिद्ध हुआ, उसी के कारण इसे बैद्यनाथ कहा जाने लगा।

राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (31 मार्च 2026)
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महावीर जयंती पर श्रमण मुनि 108 संभव सागर जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया
केंद्र सरकार का अहम निर्णय: पेट्रोल पंपों से भी मिलेगा केरोसिन
राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
बगावत बर्दाश्त नहीं’ – टिकट विवाद पर Mamata Banerjee सख्त
बिहार को बनाएंगे देश का नंबर-1 प्रदेश – Nishant Kumar की पहली प्रतिक्रिया
एमएसएमई इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों का प्रभावी केन्द्र और लाखों परिवारों के स्वावलंबन का हैं आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
होर्मुज संकट से हड़कंप: Strait of Hormuz बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा खतरा
नक्सलवाद पर संसद में गरजे Amit Shah, कहा– ‘गोली का जवाब गोली से