बांसिया गांव में गहराया जल संकट, रायसेन कलेक्टर से नए बोरवेल और टंकी निर्माण की मांग
-प्रतिदिन पानी के लिए महिलाएं कर रही हैं जद्दोजहद, 2 किमी दूर से ला रही हैं पीने का पानी
-गर्मी की शुरुआत में ही ग्रामीणों को पानी के लिए होना पड़ रहा है परेशान
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
जिले के सांची विकासखंड अंतर्गत अम्बाडी ग्राम पंचायत के बंसिया गांव में नल-जल योजना का बोरवेल सूख जाने से ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो गया है। मार्च माह में ही बोरवेल सूख जाने से गांव के लोगों को पानी के लिए करीब दो किलोमीटर दूर खेतों तक जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी का मौसम अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन इससे पहले ही पानी की समस्या गंभीर हो गई है। गांव की महिलाओं और बच्चों को रोजाना दूर से पानी लाकर अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं। समस्या को लेकर जनपद सदस्य प्रतिनिधि चरण सिंह ग्रामीणों के साथ रायसेन कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नए बोरवेल खुदवाने तथा गांव में टंकी निर्माण कराने की मांग की। उन्होंने बताया कि यदि जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो गर्मी के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग की है।
गांव में बनी हुई जल संकट की स्तिथि---प्रदेश सरकार की हर घर नल से जल देने की योजना जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में जलसंकट की स्थिति बनी हुई है।गांव-गांव नल जल योजना के तहत पानी टंकी बनाकर पाइप लाइन के माध्यम से पानी पहुंचाने की योजना का लाभ ग्रामीणों को समुचित तरीके से नहीं मिल रहा है। सांची जनपद पंचायत की अम्बाडी ग्राम पंचायत के बांसिया गांव में इस योजना के तहत नई पाइप लाइन तो बिछाई गई हैं। साथ ही लोगों को पानी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नल कनेक्शन भी कहीं दिए गए हैं। कहीं नही दिए गए हैं। नल कनेक्शन होने से लोगों को उम्मीद बंध गई थी की उन्हें अब पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। और सुबह वा शाम दोनों समय उन्हें पानी की सुविधा मिलने लगेगी। लेकिन काफी समय होने के बाद भी ग्रामीणों के नल जल योजना का लाभ नही मिल पा रहा है। अब तो योजना का बोर ही सूख गया है। वहीं गांव में सिर्फ 1 या 2 ही हैंडपंप है उसमें से 1 खराब और दूसरे से कम पानी कम आ रहा है। जिनसे ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में ग्रामीण पानी के लिए दर-दर भटकते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि अगर समस्या जल्द ही सही नहीं की गई तो आगे उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।
पूर्व सीएम के संकल्प पर अफसर फैर रहे पानी--- पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 2023 तक सभी गांवों में नल से जल पहुंचाने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गांवों के विकास के साथ-साथ लोगों के कल्याण के लिए, उनके विकास के लिए भी प्रमुखता से काम किया जा रहा है। सरकार द्वारा जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर में नल से जल पहुंचाने का काम बड़े जोर शोर से किया जा रहा है कि महिलाओं को पानी की समस्या से निजात मिलेगी। उन्हें घर पर ही नल से पानी उपलब्ध होगा, कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन सांची जनपद के बांसिया गांव में ऐसा नहीं हो रहा है । पीएचई विभाग के ज़िम्मेदार अधिकारी सरकार की जल जीवन मिशन योजना को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। और लाखों रुपए बर्बाद करके निर्माण कार्यों को शो पीस बनाया जा रहा है। जिसकी वजह से गांव की महिलाओं को सुबह से ही पानी के लिए जद्दोजहद करना पड़ रही है।
इनका कहना है।
बांसिया गांव में नलजल योजना का बोर सूख गया है। और गर्मी के सीजन की शुरुआत में ही गांव की महिलाओं को पानी के लिए जद्दोजहद करना पड़ रही है। वहीं योजना के पाइप भी कई स्थानों पर लीकेज हो रहे हैं। पानी की समस्या बहुत ही विकराल बनी हुई है। पीने के लिए भी पानी किसानों के खेत से लाना पड़ रहा है। हम जनसुनवाई में रायसेन कलेक्टर को आवेदन देकर नए बोरवेल कराने और टंकी निर्माण की मांग करने आए हैं।
चरण सिंह, जनपद सदस्य प्रतिनिधि।
योजना का बोर सूख जाने से हमारे मवेशी भी प्यासे मर रहे हैं। उन्हें कहां से पानी पिलाएं किसानों के खेत में लेकर जा नहीं सकते क्योंकि अभी खेतों में फैसले खड़ी हुई है। पानी की समस्या बहुत ही गंभीर हो रही है। अब हमारी समस्या का शीघ्र समाधान किया जाए।
फूलबाई, ग्रामीण महिला।
गांव में नल जल योजना का बोर सूख गया है। हमें प्रतिदिन 2 किलोमीटर दूर से पीने के लिए पानी लाना पड़ रहा है। हमने पहले भी जनसुनवाई में समस्या से संबंधित शिकायत की थी लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। अब हम फिर से सभी महिलाएं इकट्ठा होकर रायसेन कलेक्टर से समस्या के समाधान की उम्मीद लेकर आए हैं। अब देखते हैं कि हमारी सुनवाई कब तक होती है।
चंदाबाई, ग्रामीण महिला।

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