स्कूल टाइमिंग में बदलाव, छात्रों के लिए नई दिनचर्या
लखनऊ | प्रदेश के बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में एक अप्रैल बुधवार से नए सत्र 2026-27 की शुरुआत होगी। नए सत्र में छात्रों का स्क्रीन टाइम कम करने, अखबार व किताबें पढ़ने को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही माध्यमिक विद्यालय में मोबाइल लाने पर सख्ती की जाएगी। पहले दिन से विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए स्कूल चलो अभियान भी शुरू होगा।बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से नए सत्र के लिए जारी निर्देश में कहा गया है कि विद्यार्थियों में स्क्रीन टाइम कम करने के लिए समाचार पत्र पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। हर दिन प्रार्थना सभा में समाचार पत्र की मुख्य खबरों को छात्रों से पढ़वाया जाएगा। इसमें कठिन शब्दों का उच्चारण व अर्थ के साथ बताया जाएगा।इसके साथ ही बच्चों का भाषाई व तार्किक विकास भी अख़बार के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए उनके बीच महत्वपूर्ण विषयों पर संपादकीय लिखने, कक्षा में समूह चर्चा कराने, अखबार में प्रकाशित समस्याओं व विकास की खबरों पर भी चर्चा आयोजित की जाएगी।कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों को विज्ञान, पर्यावरण व खेल की खबरों की कतरनें काटकर स्क्रैप बुक भी तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। हफ्ते में एक दिन समाचार पत्रों में प्रकाशित सुडोकू, वर्ग पहली व ज्ञानवर्धक क्विज को हल करने की प्रतियोगिता भी कराई जाएगी। ताकि छात्रों की तार्किक क्षमता बढ़े।
अखबार पढ़ना किया गया अनिवार्य
बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए हर विद्यालय में पुस्तकालयों में हिंदी व अंग्रेजी के प्रतिष्ठित अखबार अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। सभी विभागीय अधिकारियों को इसे प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही बुधवार से 15 अप्रैल तक बेसिक व माध्यमिक विद्यालय में व्यापक स्तर पर स्कूल चलो अभियान भी शुरू किया जाएगा।ज्यादा से ज्यादा बच्चों के नामांकन, छूटे व ड्रॉप आउट बच्चों को चिन्हित कर स्कूल तक लाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। विभागीय अधिकारी व जिला प्रशासन के अधिकारी संयुक्त रूप से जिले में इसके लिए अभियान चलाएंगे। स्कूल चलो अभियान के लिए जिलों में प्रभात फेरी, रैली व नुक्कड़ नाटक आदि के माध्यम से भी लोगों को जागरूक भी किया जाएगा।
मोबाइल की जगह लेंगी किताबें
माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि विद्यालय में छात्रों के लिए मोबाइल लाना पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। बच्चों के मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से शारीरिक, मानसिक व नैतिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में उनकी रुचि मोबाइल से हटाकर अखबार व किताबों को पढ़ने में लगाने के लिए प्रयास किया जाएगा।

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