नींद क्यों उड़ रही है? सफेद रोशनी और स्क्रीन टाइम बन रहे हैं बड़ी वजह
आजकल बहुत से लोग यह सोचकर सुकून महसूस करते हैं कि उन्होंने फोन का इस्तेमाल कम कर दिया है, इसलिए उनकी नींद और मेंटल हेल्थ बेहतर हो जाएगी. लेकिन असलियत इससे थोड़ी अलग है. आधुनिक ऑफिस लाइफ में स्क्रीन से दूरी बनाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि लैपटॉप, मीटिंग्स और तेज रोशनी लगातार दिमाग को एक्टिव बनाए रखते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि मोबाइल के अलावा और क्या है कारण.
ईमेल भी है कारण
सुबह की शुरुआत ईमेल से होती है और दिन भर स्क्रीन के सामने बैठकर काम चलता रहता है. ऊपर से ऑफिस की तेज, सफेद रोशनी भी दिन जैसी ही लगती है. ऐसे में शरीर को यह संकेत ही नहीं मिल पाता कि अब आराम का समय है. नतीजा यह होता है कि रात में नींद हल्की लगती है, दिमाग शांत नहीं होता और सुबह उठना भारी महसूस होता है.
छिपे हुए स्क्रीन एक्सपोजर
यह समस्या सिर्फ ज्यादा फोन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि छिपे हुए स्क्रीन एक्सपोजर से जुड़ी है. एक सामान्य ऑफिस जॉब में 6 से 10 घंटे तक स्क्रीन देखना आम बात है. फर्क सिर्फ इतना है कि यह काम का हिस्सा होता है, इसलिए लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन दिमाग के लिए स्क्रीन स्क्रीन ही होती है, चाहे वह काम की हो या मनोरंजन की.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
डॉ. नेहा कपूर बताती हैं कि लोग अक्सर सोचते हैं कि फोन कम इस्तेमाल करने से वे स्क्रीन के नुकसान से बच जाएंगे, जबकि ऑफिस में लैपटॉप और कमरे की रोशनी भी शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करती है. इससे मेलाटोनिन हार्मोन बनने में रुकावट आती है, जो नींद के लिए बेहद जरूरी है. जब मेलाटोनिन का स्तर प्रभावित होता है, तो सोने का समय आगे खिसक जाता है. भले ही आप समय पर बिस्तर पर चले जाएं, लेकिन दिमाग ऑफ नहीं हो पाता. यही वजह है कि कई लोग थकान के बावजूद देर तक जागते रहते हैं.
नींद होती है प्रभावित
इस बात को कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी मान चुकी हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, शाम के समय ब्लू लाइट का एक्सपोजर मेलाटोनिन को कम कर देता है और नींद की क्वालिटी खराब करता है. वहीं सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन भी मानता है कि सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल नींद को प्रभावित करता है. सिर्फ रोशनी ही नहीं, बल्कि लगातार मानसिक सक्रियता भी एक बड़ी वजह है. दिन भर ईमेल, मैसेज और मीटिंग्स दिमाग को पूरी तरह शांत नहीं होने देते. इसका असर धीरे-धीरे दिखता है, फोकस कम होने लगता है, याददाश्त कमजोर पड़ती है और मूड में बदलाव आने लगता है.
बचने के लिए क्या हैं उपाय
हालांकि इससे बचने के लिए कुछ छोटे बदलाव काफी मदद कर सकते हैं. हर 20 मिनट में कुछ सेकंड के लिए स्क्रीन से नजर हटाना, शाम के समय स्क्रीन की ब्राइटनेस कम करना, सोने से पहले 45-60 मिनट का गैप रखना और कमरे की लाइट हल्की करना, ये सभी आदतें नींद को बेहतर बना सकती हैं. एक्सपर्ट्स यही कहते हैं कि नींद को हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह सिर्फ आराम नहीं, बल्कि दिमाग के सही तरीके से काम करने के लिए जरूरी प्रक्रिया है. छोटी-छोटी आदतें बदलकर भी आप अपनी नींद और मेंटल सेहत को बेहतर बना सकते हैं.

बदलेंगे गर्भपात के नियम? एम्स की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिए सख्त संकेत
“अटूट विश्वास ने बदली जिंदगी” – सुधा चंद्रन का भावुक बयान
फैंस बोले- “जल्दी ठीक हों”, सोशल मीडिया पर दुआओं की बाढ़
Katrina Kaif बनीं सहारा, सिखाया कॉन्फिडेंस का मंत्र
Rishi Kapoor की पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया पर उमड़ा प्यार
ICSE, ISC Result 2026 Out: बेटियों का शानदार प्रदर्शन, 10वीं में 99.18% और 12वीं में 99.13% छात्र पास
264 रन की पारी से दुनिया दंग, आज भी कायम है जलवा
सलमान की बात सुनकर चौंक गए रितेश, फिर हुआ दिलचस्प मोड़
विशेष सत्र में गरमा गया सदन, विपक्ष-सरकार आमने-सामने
‘महावतार’ के लिए 18 महीने की लंबी तैयारी में जुटेंगे विक्की कौशल