ऋषिकेश में चौरासी कुटिया जहां देश-विदेश के लोग करते थे ध्यान और साधना
नई दिल्ली। ऋषिकेश में गंगा नदी के किनारे स्थिति आश्रम, मंदिर और टूरिस्ट स्पॉट लोगों को सुकून देते हैं। लक्ष्मण झूला, त्रिवेणी घाट और पहाड़ों के बीच छिपी शांत जगहों के बीच एक ऐसी ही खास जगह है चौरासी कुटिया, जिसे बीटल्स आश्रम भी कहा जाता है। यह स्थान ध्यान और साधना के लिए मशहूर है, लेकिन चौरासी कुटिया का यह स्थान अपने अनोखे इतिहास और विदेशी कनेक्शन के कारण भी ऋषिकेश के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो चुका है।
ऋषिकेश की पहाड़ियों में स्थति आश्रम की स्थापना 1960 के दशक में महर्षि महेश योगी ने की थी। वे ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन तकनीक के लिए दुनियाभर में मशहूर थे। उनका मानना था कि ध्यान के जरिए व्यक्ति अपने मन को शांत कर सकता है और जीवन में संतुलन ला सकता है। भारत ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग यहां ध्यान लगाने आते थे। इस आश्रम का नाम चौरासी कुटिया था। चौरासी कुटिया इस जगह का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यहां कुल 84 छोटी-छोटी ध्यान कुटियाएं बनाई गई थीं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस आश्रम में कई इमारतें हैं, जिनमें एक पुराना रसोईघर, मंदिर, कुछ आवासीय भवन, पुस्तकालय, एक पुराना डाकघर, महर्षि का निवास स्थान है। इन कुटियाओं का डिजाइन बेहद खास था, जिससे किसी भी व्यक्ति को एकांत और शांति मिल सके। हर कुटिया इस तरह बनाई गई थी कि बाहरी शोर कम से कम सुनाई दे और ध्यान में पूरी एकाग्रता बनी रहे। यही वजह थी कि यह जगह साधना के लिए आदर्श मानी जाती थी।
इस आश्रम को खास पहचान 1968 में मिली, जब दुनिया का मशहूर बैंड द बीटल्स यहां पहुंचा। बैंड के सदस्य पॉल मैककार्टनी, जॉन लेनन, जॉर्ज हैरिसन और रिंगो स्टार ध्यान और आत्मिक शांति की तलाश में यहां आए थे। उस समय पश्चिमी देशों में भारतीय योग और ध्यान को लेकर काफी उत्सुकता थी, इसी वजह से वे लोग यहां आए थे। कहा जाता है कि उन्होंने यहां रहते हुए कई गाने लिखे, जो बाद में उनकी मशहूर व्हाइट एल्बम का हिस्सा भी बने। इसके बाद ऋषिकेश और यह आश्रम दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया।
स्थानीय लोगों की मानें तो कुछ समय बाद परिस्थितियां बदलने लगीं और महर्षि महेश योगी इस आश्रम को छोड़कर कहीं और चले गए। इसके बाद यहां की गतिविधियां कम होती गईं। सन् 1980 में यह जगह पूरी तरह से बंद हो गई और यह खंडहर में बदलने लगी। कई सालों तक यह जगह वीरान रही। करीब 30 साल तक बंद रहने के बाद साल 2015 में इस आश्रम को फिर से पर्यटकों के लिए खोला गया। इसके बाद यह जगह ऋषिकेश की एक प्रमुख और फेवरेट पर्यटक स्थल बन गई। आज यहां देश-विदेश से हजारों लोग घूमने आते हैं।
आज चौरासी कुटिया में आपको पुरानी ध्यान कुटियाएं, मेडिटेशन हॉल और दीवारों पर बनी आकर्षक ग्रैफिटी यानी (भित्तिचित्र कला) देखने को मिलेंगी। इन ग्रैफिटी में बीटल्स और अध्यात्म से जुड़ी कई खूबसूरत तस्वीरें बनी हुई है, जो इस जगह को ओर भी खास बनाती हैं। यहां का माहौल आज भी शांत और सुकून देने वाला लगता है। घने जंगलों के बीच यह वीरान जगह लोगों को शहर की भागदौड़ से दूर ले जाकर कुछ समय के लिए मानसिक शांति देती है।
ऋषिकेश में चौरासी कुटिया के अलावा कई ऐसी जगह हैं, जहां आप नेचर और एडवेंचर का मजा ले सकते हैं, जिनमें लक्ष्मण झूला, राम झूला, त्रिवेणी घाट, नीलकंठ महादेव मंदिर, परमार्थ निकेतन आश्रम, शिवपुरी और राजाजी नेशनल पार्क शामिल हैं। राम झूला से करीब तीन किमी दूर स्थित, ऑटो या टैक्सी से पहुंचा जा सकता है। यह जगह राम झूला से पैदल दूरी पर स्थित है। आप यहां गाड़ी से भी आ सकते हैं।

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