पर्यावरण संकट का दावा: न्यूक्लियर प्लांट से हडसन नदी में रेडियोधर्मी रिसाव, करोड़ों मछलियों की मौत का आरोप
नई दिल्ली। परमाणु ऊर्जा संयंत्र आधुनिक (Nuclear Power Plants) समय में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं, लेकिन अमेरिका (America) के न्यूयॉर्क स्थित इंडियन पॉइंट न्यूक्लियर पावर प्लांट (Indian Point Nuclear Power Plant) को लेकर एक गंभीर रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस संयंत्र ने करीब 60 वर्षों तक हडसन नदी में लाखों गैलन रेडियोधर्मी अपशिष्ट जल छोड़ा, जिससे पर्यावरण और जलीय जीवन पर गंभीर असर पड़ा।
संयंत्र की शुरुआत 16 सितंबर 1962 में हुई थी और 2021 में इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया। 1970 के दशक की एक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख मिलता है कि यह संयंत्र हर साल 2 से 3 मिलियन गैलन तक उपचारित अपशिष्ट जल नदी में छोड़ता था। हालांकि, प्रबंधन का कहना था कि यह पानी उपचार प्रक्रिया से गुजरकर ही छोड़ा जाता था।
मछलियों की बड़े पैमाने पर मौत का दावा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि संयंत्र की शीतलन प्रणाली के कारण बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हुई। नदी से पानी खींचने के लिए लगाए गए इनटेक सिस्टम में मछलियाँ फंस जाती थीं, जिससे भारी नुकसान हुआ। अनुमानों के अनुसार, 1962 से 1970 के बीच लगभग 15 लाख से 50 लाख मछलियों की मौत हुई। समय के साथ यह समस्या और गंभीर होती गई, क्योंकि मछलियाँ संयंत्र के आसपास के हिस्सों में इकट्ठा होने लगी थीं, जिससे उनका जोखिम और बढ़ गया।
स्वामित्व और प्रबंधन पर उठे सवाल
संयंत्र के वर्तमान मालिक होल्टेक इंटरनेशनल ने स्वीकार किया है कि वर्षों तक अपशिष्ट जल का उत्सर्जन होता रहा, हालांकि कंपनी का कहना है कि उनके नियंत्रण में आने के बाद सभी गतिविधियां निर्धारित सुरक्षा मानकों के भीतर की गई हैं। होल्टेक ने यह भी स्पष्ट किया कि अब उसका मुख्य काम संयंत्र के डीकमीशनिंग (बंद करने की प्रक्रिया) और पुराने रेडियोधर्मी कचरे के सुरक्षित प्रबंधन का है, जिसमें प्रयुक्त ईंधन का निपटान भी शामिल है।
पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ी
रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि दशकों तक चले इस उत्सर्जन का असर हडसन नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ा है। जलीय जीवन प्रभावित हुआ है और स्थानीय पर्यावरण पर भी दीर्घकालिक प्रभाव की आशंका जताई गई है।

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