नवजात को नमक देना क्यों है जोखिम भरा? डॉक्टरों ने बताया कारण
भारत के कई हिस्सों में नवजात शिशु के जन्म के तुरंत बाद उसे नमक चटाने की परंपरा आज भी प्रचलित है। इसे कुछ लोग शुभ मानते हैं, तो कुछ इसे पुराने रीति-रिवाजों का हिस्सा बताते हैं। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इस प्रथा को सुरक्षित नहीं मानता।जन्म के बाद शिशु का शरीर बेहद नाजुक होता है और उसका पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता। ऐसे में नमक जैसी चीजें देना उसके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। आइए जानते हैं कि नवजात को नमक चटाना कितना सही है और इससे क्या खतरे हो सकते हैं।किडनी पर पड़ता है बुरा असर नवजात शिशु की किडनी जन्म के समय पूरी तरह विकसित नहीं होती। ऐसे में जब उसे नमक दिया जाता है, तो शरीर में सोडियम का स्तर अचानक बढ़ सकता है। किडनी इतनी कम उम्र में अतिरिक्त सोडियम को फिल्टर करने में सक्षम नहीं होती, जिससे किडनी पर दबाव पड़ता है। गंभीर मामलों में यह स्थिति इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और किडनी फेलियर तक ले जा सकती है। इसलिए डॉक्टर नवजात को नमक देने से सख्त मना करते हैं।डिहाइड्रेशन का खतरा नमक शरीर में पानी के संतुलन को प्रभावित करता है। जब छोटे बच्चे को नमक दिया जाता है, तो उसके शरीर में पानी की कमी हो सकती है। नवजात पहले से ही बहुत संवेदनशील होते हैं और उनमें पानी की कमी जल्दी हो जाती है। इसके लक्षणों में सुस्ती, कम पेशाब, मुंह सूखना और रोते समय आंसू न आना शामिल हैं। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।संक्रमण का जोखिम जन्म के तुरंत बाद शिशु की इम्यूनिटी बेहद कमजोर होती है। इस समय उसे किसी भी बाहरी पदार्थ जैसे नमक, शहद या घुट्टी का सेवन कराना संक्रमण का खतरा बढ़ा देता है। नमक साफ दिखने के बावजूद उसमें बैक्टीरिया या अशुद्धियां हो सकती हैं। इसके अलावा, इसे देने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हाथ या उंगलियां भी संक्रमण का स्रोत बन सकती हैं। इससे पेट में संक्रमण, उल्टी, दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं डॉक्टर क्या कहते हैं बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के बाद नवजात के लिए केवल मां का दूध ही सबसे सुरक्षित और संपूर्ण आहार है। मां के दूध में सभी जरूरी पोषक तत्व सही मात्रा में होते हैं, जिसमें सोडियम भी शामिल है। 6 महीने तक बच्चे को किसी भी तरह का अतिरिक्त नमक, पानी या बाहरी आहार देने की जरूरत नहीं होती। यह न सिर्फ सुरक्षित है, बल्कि बच्चे की इम्यूनिटी और विकास के लिए भी बेहद जरूरी है।

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