25 लाख का जुर्माना और आजीवन कारावास; नए कानून की कठोरता पर छिड़ी कानूनी जंग
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में हाल ही में लागू हुए ‘धर्म स्वातंत्र्य कानून 2026’ के खिलाफ ईसाई समुदाय ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। समुदाय की ओर से क्रिस्टोफर पाल ने इस कानून के कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताया है। याचिका में मुख्य रूप से अवैध धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास जैसे कठोर दंड और भारी जुर्माने के प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई गई है।
नए कानून के तहत जबरन या लालच से धर्मांतरण कराने पर 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और सामूहिक धर्मांतरण में 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, धर्म परिवर्तन से पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना अनिवार्य किया गया है और इन अपराधों को गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है। दूसरी ओर, राज्य सरकार का तर्क है कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल धोखाधड़ी और दबाव से होने वाले अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए है।

Financial Fraud Case: कमलेश पारेख प्रत्यर्पण, CBI की बड़ी कार्रवाई
क्या गर्मी में ग्रीन-टी से बढ़ेगी गर्मी? एक्सपर्ट की राय
IPL 2026 में राहुल का धमाका, रोहित-कोहली भी नहीं कर सके ऐसा
हेल्थ टूरिज्म में भारत की बड़ी छलांग, 2030 तक 16 अरब डॉलर का बाजार
नौसेना प्रमुख का म्यांमार दौरा, रक्षा सहयोग पर होगी अहम चर्चा
मोबाइल और सोशल मीडिया का असर, मानसिक स्वास्थ्य पर खतरा
सोडियम लेवल गिरा तो बढ़ सकता है खतरा, जानें लक्षण
Cabinet Expansion Buzz: सम्राट चौधरी का दिल्ली दौरा, क्या जल्द होगा विस्तार?
रचिन की एंट्री से बदलेगा गेम? टीम मैनेजमेंट का बड़ा फैसला
लैपटॉप-मोबाइल के जरिए चल रहा था सट्टा कारोबार