‘राष्ट्र सेवक नहीं…’ बयान पर राजनीति गरमाई, पक्ष-विपक्ष आमने-सामने
नई दिल्ली। देश की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके वरिष्ठ नेता राम माधव पर तीखा जुबानी हमला बोला। राहुल गांधी ने राम माधव के अमेरिका में दिए गए बयानों को आधार बनाकर आरएसएस को 'राष्ट्रीय सरेंडर संघ' करार दिया और उनके राष्ट्रवाद को 'फर्जी' बताया।
राहुल गांधी का करारा प्रहार
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा:
"राष्ट्रीय सरेंडर संघ। नागपुर में फर्जी राष्ट्रवाद और अमेरिका में शुद्ध चाटुकारिता। राम माधव ने संघ की असली फितरत को दुनिया के सामने रख दिया है।"
यह विवाद तब उपजा जब राम माधव ने वाशिंगटन डीसी में 'हडसन इंस्टीट्यूट' द्वारा आयोजित 'न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस' में भारत-अमेरिका संबंधों पर चर्चा की। इस पैनल चर्चा का विषय 'भारत-अमेरिका संबंधों के लिए नए रास्ते' था।
विवाद की जड़: राम माधव का बयान
पैनल चर्चा के दौरान राम माधव ने भारत की विदेश और व्यापार नीति का बचाव करते हुए कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ संबंधों के लिए कई समझौते किए हैं। उन्होंने तर्क दिया था:
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भारत ने ईरान से तेल लेना बंद किया।
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विपक्ष के विरोध के बावजूद रूस से तेल आयात बंद करने पर सहमति जताई।
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भारत ने बिना किसी बड़े विरोध के 50% टैरिफ भी स्वीकार कर लिया।
उन्होंने सवाल उठाया था कि इतना सब करने के बाद भी अमेरिका के साथ सहयोग में भारत कहाँ कमी छोड़ रहा है? उनके इसी बयान को कांग्रेस ने भारत के आत्मसम्मान के साथ समझौता बताया।
राम माधव ने मांगी माफी: स्वीकार की अपनी गलती
बयान पर विवाद बढ़ने और तथ्यों पर सवाल उठने के बाद राम माधव ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा:
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"पैनल चर्चा के दौरान मेरे द्वारा कहे गए तथ्य गलत थे।"
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"भारत ने कभी भी रूस से तेल आयात रोकने पर सहमति नहीं दी और न ही 50% टैरिफ को चुपचाप स्वीकार किया।"
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उन्होंने स्वीकार किया कि वे दूसरे पैनलिस्ट के सामने अपनी बात रखने की कोशिश में गलत जानकारी दे गए और इसके लिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी।
भारत की तेल नीति की वास्तविकता
आधिकारिक आंकड़ों और सूत्रों के अनुसार, भारत की ऊर्जा नीति स्वतंत्र रही है:
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रूस से आयात: 2022 में रूस से भारत का तेल आयात महज 0.2% था, जो फरवरी 2024 तक बढ़कर 20% हो गया।
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आपूर्ति मार्ग: भारत का लगभग 40% कच्चा तेल 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के रास्ते आता है, जबकि बाकी 60% अन्य अंतरराष्ट्रीय मार्गों से मंगाया जाता है।

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