टेक्सटाइल सेक्टर पर दबाव, निर्यात घटने से उद्योग चिंतित
नई दिल्ली।भारत के टेक्सटाइल और गारमेंट (वस्त्र एवं परिधान) निर्यात के लिए वित्त वर्ष 2025-26 चुनौतियों भरा रहा है। आर्थिक थिंक टैंक 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (GTRI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र के कुल निर्यात में 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह आंकड़ा 35.8 अरब डॉलर पर सिमट गया है। भारतीय मुद्रा (रुपये) के मूल्य में भी निर्यात में 2.1 प्रतिशत की कमी आई है।
प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट का रुझान
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि टेक्सटाइल की लगभग सभी बड़ी श्रेणियों को नुकसान उठाना पड़ा है:
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सूती वस्त्र (Cotton Textiles): इसमें 3.9 प्रतिशत की कमी आई।
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तैयार कपड़े (Ready-made Garments): इस क्षेत्र में 1.4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
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कालीन निर्यात (Carpet Export): इसमें सबसे अधिक 5.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
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हस्तशिल्प (Handicraft): केवल इस सेक्टर में मामूली सुधार दिखा, जहाँ 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
मुद्रा के उतार-चढ़ाव और आर्थिक चिंता
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण आर्थिक चिंता की ओर इशारा किया है। उन्होंने बताया कि डॉलर और रुपये के बीच का अंतर भारतीय व्यापार की कमजोर स्थिति को दर्शाता है।
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भ्रामक वृद्धि: कई क्षेत्रों में रुपये के हिसाब से निर्यात बढ़ता दिख रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमाई कम हो रही है।
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उदाहरण: मैन-मेड टेक्सटाइल का निर्यात रुपये में 3.6% बढ़ा, लेकिन डॉलर में यह 0.8% घट गया। इसी तरह, गारमेंट निर्यात रुपये में 2.9% बढ़ा, जबकि डॉलर में इसमें 1.4% की गिरावट आई।
विफलता के कारण और नीतिगत सवाल
श्रीवास्तव के अनुसार, निर्यात में दिखने वाली छद्म बढ़त का कारण प्रतिस्पर्धा में सुधार नहीं, बल्कि रुपये का कमजोर होना है। वास्तविकता यह है कि भारत वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ खो रहा है और श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labor-intensive sectors) में पिछड़ रहा है।
सरकार के समक्ष चुनौतियां:
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योजनाओं का प्रभाव: रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि PLI योजना, लॉजिस्टिक्स में सुधार और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' जैसे सरकारी प्रयासों के बावजूद निर्यात में अपेक्षित वृद्धि क्यों नहीं हो रही है?
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सुधार की मांग: GTRI ने सरकार से उन बाधाओं की तत्काल पहचान करने का आग्रह किया है जो कपड़ा और परिधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निर्यात क्षमता को रोक रही हैं।

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