दिल्ली HC पहुंचा वाड्रा का याचिका, ट्रायल कोर्ट समन पर रोक लगाने की मांग
नई दिल्ली: गुरुग्राम के शिकोहपुर क्षेत्र में हुए एक भूमि सौदे से संबंधित धन शोधन के मामले में उद्यमी रॉबर्ट वाड्रा ने कानूनी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी किए गए समन के विरुद्ध दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। वाड्रा ने अपनी याचिका के माध्यम से निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की है जिसके तहत उन्हें जांच के दायरे में शामिल होने के लिए निर्देशित किया गया था।
उच्च न्यायालय में सुनवाई की तैयारी
इस महत्वपूर्ण याचिका को न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ के समक्ष गुरुवार को सुनवाई के लिए तय किया गया है। रॉबर्ट वाड्रा ने विशेष रूप से ट्रायल कोर्ट द्वारा 15 अप्रैल को पारित किए गए उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी। अब उच्च न्यायालय की पीठ यह तय करेगी कि निचली अदालत के आदेश पर आगे की कार्यवाही जारी रहेगी या वाड्रा को इस मामले में कोई राहत प्रदान की जाएगी।
व्यापारिक लेनदेन और निर्दोषता का दावा
वाड्रा की ओर से उनके अधिवक्ता प्रतीक कृष्ण चड्ढा ने दलील पेश करते हुए स्पष्ट किया है कि इस पूरे सौदे में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या अवैध गतिविधि शामिल नहीं थी। याचिका में यह तर्क दिया गया है कि शिकोहपुर का भूमि सौदा पूरी तरह से एक सामान्य और वैध व्यावसायिक प्रकृति का लेनदेन था। बचाव पक्ष का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई तथ्यों से परे है और इसे अनावश्यक रूप से मनी लॉन्ड्रिंग के चश्मे से देखा जा रहा है।
ट्रायल कोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल
रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी चुनौती में ट्रायल कोर्ट के विवेक पर सवाल उठाते हुए इसे निरस्त करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि संबंधित विभाग उनके विरुद्ध ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा है और यह मामला केवल व्यावसायिक सौदेबाजी तक ही सीमित है। उच्च न्यायालय में होने वाली इस बहस पर सभी की निगाहें टिकी हैं क्योंकि यह भूमि घोटाला लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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