परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल, मेहमान भी हुए भावुक
खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जिस घर में कुछ ही दिनों बाद शहनाइयां गूंजने वाली थीं और बारात का स्वागत होने वाला था, वहां अचानक चीख-पुकार मच गई। कसरावद तहसील के टकड़ी गांव में रहने वाली 22 वर्षीय राखी की शादी आगामी 26 अप्रैल को तय हुई थी। पूरा कुनबा उत्साह के साथ विवाह के रीति-रिवाजों में व्यस्त था, लेकिन हल्दी की रस्म ने खुशियों को पलभर में मातम में तब्दील कर दिया।
रस्म के चंद घंटों बाद चेहरे पर आई सूजन और जलन
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, 22 अप्रैल को घर में पारंपरिक हल्दी और चिकसा की रस्म का आयोजन किया गया था। इसके लिए स्थानीय बाजार से खुली हल्दी खरीदी गई थी, जिसे राखी समेत परिवार की करीब 15 महिलाओं को लगाया गया। रस्म के समय सब कुछ सामान्य था, मगर रात होते-होते राखी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उसके गले में असहनीय जलन होने लगी, होंठ सूज गए और पूरे बदन पर लाल रंग के चकत्ते उभर आए।
गंभीर एलर्जिक रिएक्शन की आशंका; इंदौर किया गया रेफर
दुल्हन की बिगड़ती स्थिति को देखकर घबराए परिजन उसे तुरंत खरगोन जिला चिकित्सालय ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद भी जब हालत में सुधार नहीं हुआ और सांस लेने में तकलीफ बढ़ने लगी, तो डॉक्टरों ने उसे गंभीर एलर्जिक रिएक्शन (Allergic Reaction) की आशंका जताते हुए इंदौर के एमवाय (MY) अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इंदौर में राखी के कई जरूरी मेडिकल टेस्ट, एक्स-रे और ईसीजी (ECG) किए गए, लेकिन चेहरे की सूजन और गले की तकलीफ लगातार बढ़ती चली गई।
अस्पताल बदलते समय रास्ते में ही थम गईं सांसें
एमवाय अस्पताल में स्थिति नियंत्रण में न आते देख, परिजन बेहतर इलाज की उम्मीद में राखी को इंदौर के ही एक निजी अस्पताल ले गए। हालांकि, आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण परिवार के लिए निजी अस्पताल का भारी-भरकम खर्च उठा पाना मुश्किल साबित हो रहा था। विवश होकर परिजनों ने उसे दोबारा सरकारी अस्पताल शिफ्ट करने का निर्णय लिया, परंतु किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही राखी ने दम तोड़ दिया। इस घटना से तीन बहनों में सबसे बड़ी राखी के माता-पिता और पूरे गांव पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
बिना विसरा जांच और पोस्टमार्टम के हुआ अंतिम संस्कार
राखी की असमय मौत के बाद दुखी परिवार ने इस मामले में पुलिस से कोई शिकायत नहीं की। वैधानिक प्रक्रिया और पोस्टमार्टम न होने के कारण मृतका का अंतिम संस्कार सीधे गांव में ही कर दिया गया। बिना चिकित्सकीय शव परीक्षण (Post-mortem) के अब इस बात का आधिकारिक पता लगाना लगभग असंभव है कि मौत की असली वजह बाजार से खरीदी गई केमिकल युक्त हल्दी का रिएक्शन था या कोई अन्य अंदरूनी बीमारी।

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