दिल्ली में हाइड्रोजन बस का पहला अनुभव, रूट और टाइमिंग की डिटेल्स
नई दिल्ली: देश की राजधानी के निवासियों के लिए सार्वजनिक परिवहन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र से एक बेहद शानदार और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। दिल्ली में प्रदूषण मुक्त सफर को बढ़ावा देने के लिए पहली बार अत्याधुनिक हाइड्रोजन ईंधन से संचालित होने वाली बसों के व्यावसायिक परिचालन का आधिकारिक आगाज कर दिया गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ एक साझा समन्वय स्थापित करते हुए सेंट्रल विस्टा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस अनूठी 'इंटीग्रेटेड हाइड्रोजन-पावर्ड शटल बस सेवा' को धरातल पर उतारा है, जो आने वाले समय में शहरी यातायात की दिशा बदलने में मील का पत्थर साबित होगी।
दो बसों के साथ सेवा का शुभारंभ और मुख्य अतिथियों की उपस्थिति
कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से आम यात्रियों के लिए दो विशेष हाइड्रोजन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस ऐतिहासिक उद्घाटन के अवसर पर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के निदेशक (रिफाइनरी) अरविंद कुमार ने डीएमआरसी के निदेशक (ऑपरेशंस एंड सर्विसेज) डॉ. अमित कुमार जैन को अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामय मौजूदगी में इन बसों की प्रतीकात्मक चाबियां सौंपीं। यह कदम दिल्ली में टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन तंत्र को विकसित करने की दिशा में एक बड़े नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
अत्याधुनिक तकनीकी सुरक्षा और मार्ग निर्धारण की समय सारणी
यात्रियों की सुगम और सुरक्षित यात्रा के लिए इन विशेष बसों को पूरी तरह से आधुनिक डिजिटल उपकरणों और सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। प्रत्येक बस के भीतर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उन्नत जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और संवेदनशील सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं, ताकि बसों की समयबद्धता और उनके निर्धारित रूट के पालन पर नियंत्रण कक्ष से चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा सके। दिल्ली मेट्रो प्रबंधन के अनुसार इन बसों के संचालन के लिए दो मुख्य समय चक्र निर्धारित किए गए हैं, जिसके तहत ये गाड़ियां सुबह साढ़े आठ बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक और फिर दोपहर बाद साढ़े तीन बजे से शाम साढ़े छह बजे तक सड़कों पर अपनी सेवाएं प्रदान करेंगी।
लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर का विस्तार
इस विशेष परियोजना का मुख्य खाका सेंट्रल विस्टा जोन के आस-पास के क्षेत्रों में पर्यावरण के अनुकूल 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' यानी मेट्रो स्टेशनों से अंतिम गंतव्य तक पहुंचने के विकल्प को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। यद्यपि दिल्ली मेट्रो को महानगर का सबसे टिकाऊ और कम कार्बन उत्सर्जन वाला परिवहन साधन माना जाता है, परंतु भौगोलिक सीमाओं के कारण रेल नेटवर्क हर कोने तक नहीं पहुंच सकता है, जिसके चलते यह नई बस सेवा उन अंतरालों को पाटने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। शुरुआती चरण में इन ग्रीन बसों का सुचारू संचालन केंद्रीय सचिवालय से लेकर सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशन के मध्य किया जा रहा है, जिससे दैनिक यात्रियों को जाम और प्रदूषण से बड़ी राहत मिलेगी।
सरकारी कॉलोनियों को जोड़ने और भविष्य के विस्तार का रोडमैप
सरकार और आपदा प्रबंधन विभागों की इस संयुक्त पर्यावरण-हितैषी पहल के पीछे एक व्यापक दीर्घकालिक ढांचागत योजना छिपी हुई है। इस सफल प्रयोग के बाद आने वाले दिनों में प्रशासन का मुख्य ध्यान विभिन्न केंद्रीय सरकारी आवासीय कॉलोनियों को उनके सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशनों से सीधी शटल बस सेवा के माध्यम से जोड़ने का है। इस दूरगामी रणनीति के अमल में आने से न केवल सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव काफी हद तक कम होगा बल्कि देश की राजधानी को स्वच्छ, हरित और श्वास लेने योग्य एक आदर्श महानगर बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को भी बड़ी मजबूती मिलेगी।

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