नई दिल्ली: दिल्ली में संसद मार्च के दौरान हाल ही में हुई हिंसा में घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवार पहली बार मीडिया के सामने आए हैं और अपना दर्द साझा करते हुए इंसाफ की गुहार लगाई है। दिल्ली पुलिस के चार कर्मचारियों के परिजनों ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर दावा किया कि इस हिंसक झड़प में 250 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर केवल एक पक्ष की बात रखी जा रही है जबकि पीड़ित पुलिसकर्मी और उनके परिवार भी हैं।

सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान और निष्पक्ष जांच की मांग

प्रेस वार्ता के दौरान परिजनों ने विभिन्न तस्वीरें और आंकड़े साझा करते हुए बताया कि प्रदर्शन के दौरान उपद्रवियों द्वारा 110 से अधिक बैरिकेड, सैकड़ों सुरक्षा उपकरण, लाउडहेलर, मेटल डिटेक्टर, सरकारी वाहन और निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। दिल्ली पुलिस महासंघ की ओर से पूर्व एसीपी केपी कुकरेती ने भी पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि हालात और अधिक बिगड़ते और संसद या सुरक्षाकर्मियों की जान पर वास्तविक खतरा उत्पन्न होता, तो कानून के तहत बल प्रयोग करने की पूरी अनुमति थी।

परिजनों की जुबानी खौफनाक मंजर और परिवारों की चिंता

घायल एसीपी की पत्नी उपनीत कौर ने भावुक होते हुए बताया कि जब उनके पति लहूलुहान हालत में घर लौटे तो उनकी दो साल की छोटी बेटी भी डर गई। इसी तरह घायल एएसआई की पत्नी सीमा और अन्य परिजनों ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात उनके पतियों और पिताओं की वर्दी खून से लथपथ थी और उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं। परिजनों का कहना था कि हर वर्दी के पीछे एक पूरा परिवार जुड़ा होता है जो ड्यूटी के दौरान हर पल मानसिक तनाव और चिंता के साये में जीता है।

असामाजिक तत्वों की घुसपैठ और केरल सरकार का बड़ा फैसला

घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी छात्र या आम प्रदर्शनकारी को दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों ने हिंसा फैलाकर माहौल बिगाड़ा था। इस बीच एक अन्य घटनाक्रम में केरल सरकार ने पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों के दौरान आंदोलनकारियों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस मामलों को वापस लेने का आधिकारिक निर्णय लिया है, जिससे इस मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।