-​7 साल पहले कलेक्टर ने दिए थे डिस्मेंटल के आदेश, पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से 40 गांवों के मरीजों की जान खतरे में

-​पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व वर्तमान विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी के क्षेत्र का मामला, कभी भी हो सकती है बड़ी जनहानि

अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

रायसेन जिले के प्रशासनिक तंत्र में अधिकारियों की लापरवाही किस कदर हावी है, इसका ज्वलंत उदाहरण सांची जनपद क्षेत्र के दीवानगंज में देखने को मिल रहा है। दीवानगंज स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में 50 साल पुराना उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन जर्जर स्थिति में खंडहर बनकर खड़ा है। यह मामला मध्यप्रदेश शासन के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं सांची विधानसभा के वर्तमान विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी के क्षेत्र से जुड़ा है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी बेफिक्र बने हुए हैं। ​सात साल बीत जाने के बाद भी लोक निर्माण विभाग ने तत्कालीन कलेक्टर के स्पष्ट आदेशों का पालन नहीं किया है। नतीजा यह है कि प्रतिदिन स्वास्थ्य केंद्र आने वाले सैकड़ों मरीज और यहां रहने वाला अस्पताल स्टाफ मौत के साए में आवाजाही करने को मजबूर है।

अक्टूबर 2019 में जारी हुआ था डिस्मेंटल आदेश--प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में स्थित इस पुराने भवन की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं और छत का हिस्सा कभी भी ढह सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए 14 अक्टूबर 2019 को रायसेन कलेक्टर द्वारा आदेश क्रमांक 6460/एस. सी. शाखा/89/2019 जारी किया गया था। आदेश में स्पष्ट उल्लेख था कि यह भवन अब मरम्मत के योग्य नहीं बचा है और इससे कभी भी गिरकर बड़ी जनहानि हो सकती है। इसलिए इसे तत्काल गिराने (डिस्मेंटल) के निर्देश लोक निर्माण विभाग को दिए गए थे। लेकिन सात साल बाद भी यह फाइल दफ्तरों के चक्कर काट रही है और जर्जर ढांचा वैसे का वैसा ही खड़ा है।

​40 गांवों के मरीजों की सुरक्षा भगवान भरोसे--दीवानगंज का यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आसपास के लगभग 40 गांवों के लिए इलाज का प्रमुख केंद्र है। हर दिन सैकड़ों ग्रामीण, बुजुर्ग और बच्चे इलाज कराने के लिए यहां पहुंचते हैं। अस्पताल के मुख्य रास्ते और परिसर में स्थित यह जर्जर भवन मरीजों के गुजरने वाले मार्ग के ठीक पास है। इसके अलावा, परिसर के भीतर ही अस्पताल के कर्मचारियों के आवासीय क्वार्टर भी हैं, जहां उनका परिवार निवास करता है। भवन की जर्जर स्थिति के कारण हर समय एक अज्ञात डर बना रहता है कि न जाने कब यह जर्जर ढांचा धराशायी हो जाए।

कुछ समय पूर्व ही दीवार गिरने से हुई थी मासूम की मौत, फिर भी सबक नहीं---स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि कुछ समय पहले ही नजदीकी गांव में एक स्कूल की जर्जर दीवार गिरने से एक मासूम बच्ची की दबकर दर्दनाक मौत हो गई थी। इतनी बड़ी घटना के बावजूद जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग ने कोई सबक नहीं सीखा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद ही उनकी नींद खुलेगी।

इनका कहना है। 

"तत्कालीन कलेक्टर ने 7 साल पहले इस जर्जर भवन को गिराने का स्पष्ट आदेश दिया था। लेकिन लोक निर्माण विभाग की घोर लापरवाही के कारण आज तक कार्रवाई नहीं हुई। 40 गांवों के मरीजों की जान जोखिम में डालकर जिम्मेदार अधिकारी तमाशबीन बने हुए हैं।

नसीम अली, वरिष्ठ पत्रकार अम्बाडी

लगभग 50 साल पुराना यह भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है। पास के गांव में स्कूल की दीवार गिरने से एक मासूम की जान जा चुकी है। क्या प्रशासन दीवानगंज में भी किसी ऐसी ही दुखद घटना का इंतजार कर रहा है? इसे तुरंत जमींदोज किया जाना चाहिए।"

महेश साहू, स्थानीय निवासी।

​"जर्जर अस्पताल भवन के ठीक बगल में स्टाफ क्वार्टर हैं और मरीजों के आने-जाने का रास्ता है। भवन की हालत इतनी खराब है कि तेज बारिश या हवा में भी इसके गिरने का डर बना रहता है। शासन-प्रशासन को इसे तुरंत संज्ञान में लेना चाहिए।"

राहुल, स्थानीय ग्रामीण।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28