130 करोड़ लोग हो चुके हैं लिवर की बीमारी के शिकार: शोध
वॉशिंगटन । आमतौर पर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी बीमारियों को सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियां माना जाता है, लेकिन एक नई स्टडी में बेहद हैरान करने वाली बात सामने आई है। साल 2023 में दुनिया भर में लगभग 130 करोड़ लोग मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीयाटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) से जूझ रहे थे।
यह आंकड़ा सोचकर देखिए कि दुनिया की पूरी आबादी लगभग 800 करोड़ है और उसमें से 130 करोड़ से भी ज़्यादा लोग लिवर की इस गंभीर बीमारी का शिकार हो चुके हैं, जो एक भयावह स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करता है। नई स्टडी के अनुसार, साल 2023 में करीब 130 करोड़ लोग लिवर डिजीज से पीड़ित थे। यह संख्या 1990 के मुकाबले लगभग 143 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाती है, जो बेहद चिंताजनक है और इस बीमारी के तेज़ी से फैलने की गति को उजागर करती है। यह स्टडी ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज, इंजरीज एंड रिस्क फैक्टर्स स्टडी 2023 के व्यापक डेटा पर आधारित है, जिसने विश्वभर में स्वास्थ्य प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया है।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो 2050 तक एमएएसएलडी के मरीजों की संख्या बढ़कर 180 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसके पीछे मुख्य कारण तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या, खराब जीवनशैली, मोटापा और उच्च रक्त शर्करा जैसी गंभीर समस्याएं हैं, जो एक साथ मिलकर इस बीमारी को बढ़ावा दे रही हैं। इस स्टडी में यह भी सामने आया कि उत्तरी अफ्रीका और मिडिल ईस्ट जैसे क्षेत्रों में लिवर डिजीज के मरीज अन्य क्षेत्रों की तुलना में ज़्यादा हैं, जो क्षेत्रीय स्वास्थ्य असमानताओं को दर्शाता है। हालांकि, एक राहत की बात यह है कि बीमारी के मामलों में बढ़ोतरी के बावजूद इससे होने वाली मौतों में ज़्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसका मतलब यह है कि इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कारण लोग पहले की तुलना में ज़्यादा समय तक और बेहतर जीवन जी पा रहे हैं, जिससे मृत्यु दर को नियंत्रित करने में मदद मिली है। शोधकर्ताओं के अनुसार, एमएएसएलडी के मामलों में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा शुरुआती स्टेज में देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद, खतरा कम नहीं हुआ है, क्योंकि समय के साथ यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियों में बदल सकती है, अगर इसका समय पर निदान और उपचार न किया जाए।
सबसे चिंता की बात यह है कि यह बीमारी अब कम और मिडिल इनकम वाले देशों में युवाओं को भी तेज़ी से प्रभावित कर रही है। शहरीकरण, फास्ट फूड की आदत और फिजिकल एक्टिविटी की कमी जैसे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं, जो युवाओं में इस बीमारी के फैलने की वजह बन रहे हैं। बदलती जीवनशैली, जिसमें स्क्रीन टाइम बढ़ना और बाहरी खेलों से दूर रहना शामिल है, ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। यह अध्ययन स्पष्ट रूप से बताता है कि एमएएसएलडी अब एक वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

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