ईरान-सऊदी विदेश मंत्रियों की फोन पर हुई बातचीत, द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा
तेहरान। ईरान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई है, जिसमें दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की गई। तेहरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से यह बातचीत की। हालांकि, इस वार्ता के समय को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है।
दूसरी ओर, सऊदी अरब के सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रिंस फैसल बिन फरहान को बुधवार शाम कतर, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और तुर्किये के विदेश मंत्रियों के भी फोन आए थे। हालांकि, इस आधिकारिक बयान में ईरान के साथ हुई बातचीत का उल्लेख नहीं किया गया। गौरतलब है कि ईरान और सऊदी अरब लंबे समय से मध्य पूर्व में क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा करते रहे हैं। इस प्रतिस्पर्धा के पीछे राजनीतिक और आर्थिक हितों के साथ-साथ धार्मिक मतभेद भी एक बड़ी वजह रहे हैं। सऊदी अरब में सुन्नी मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, जबकि ईरान में शिया समुदाय प्रमुख है, जिससे दोनों देशों के बीच वैचारिक टकराव भी बना रहता है।
संबंधों में साल 2023 में आया सुधार
दोनों देशों के संबंधों में 2023 में तब सुधार आया था, जब करीब सात साल बाद कूटनीतिक रिश्ते बहाल किए गए। इससे पहले रियाद द्वारा शिया धर्मगुरु शेख निमर अल-निमर को फांसी दिए जाने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध टूट गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा बातचीत क्षेत्र में बदलते हालात के बीच दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

1 मई अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विशेष : हर हाथ को काम, हर श्रमिक को सम्मान: विष्णु देव सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूँ उपार्जन केन्द्रों का किया आकस्मिक निरीक्षण
दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना से सावित्री को मिला संबल
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की संवेदनशील पहल
राज्य सरकार धर्म-संस्कृति की धारा को प्रवहमान बनाए रखने के लिए सतत् सक्रिय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
छत्तीसगढ़ एकलव्य विद्यालय की बड़ी उपलब्धि
पुलिस मुख्यालय परिवार द्वारा 11 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दी गई भावभीनी विदाई
MVA में 'अविश्वास' की एंट्री: उद्धव सेना की जिद और कांग्रेस की अकड़, क्या टूट जाएगा विपक्षी गठबंधन का किला?