हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन, सुनवाई वीडियो हटाने के निर्देश
दिल्ली। हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवील की अदालती कार्यवाही की अनधिकृत रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत अरोड़ा की खंडपीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार को पक्षकार बनाते हुए अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर उनका जवाब तलब किया है।
अदालती कार्यवाही की रिकॉर्डिंग मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिए लिंक हटाने के आदेश
यह पूरा मामला वकील वैभव सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पत्रकार रवीश कुमार सहित अन्य लोगों ने कोर्ट की कार्यवाही को बिना अनुमति रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित किया।
कोर्ट के प्रमुख निर्देश और टिप्पणियां
अदालत ने सुनवाई के दौरान न्यायपालिका की गरिमा और नियमों को सर्वोपरि बताया:
- लिंक हटाने का आदेश: हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि 13 अप्रैल की सुनवाई से संबंधित जितने भी सोशल मीडिया लिंक अभी भी मौजूद हैं, उन्हें तुरंत हटाया जाए।
- भविष्य की सतर्कता: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसे वीडियो दोबारा अपलोड होते हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को जानकारी मिलते ही उन्हें हटाना होगा और इसकी सूचना रजिस्ट्रार जनरल को देनी होगी।
- नियमों का हवाला: पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के नियमों के तहत बिना पूर्व अनुमति के अदालती कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और उसे सार्वजनिक करना पूरी तरह वर्जित है। साथ ही आईटी नियम, 2021 के प्रावधानों का भी जिक्र किया गया जो अवैध सामग्री को रोकने के लिए प्लेटफॉर्म्स को उत्तरदायी बनाते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि और अगली तारीख
यह मामला पहले मुख्य न्यायाधीश की पीठ के पास था, लेकिन न्यायमूर्ति तेजस करिया द्वारा खुद को सुनवाई से अलग करने के बाद इसे वर्तमान खंडपीठ को सौंपा गया। अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को करेगी, जहाँ प्रतिवादियों को अपने नोटिस का जवाब दाखिल करना होगा। तब तक के लिए केंद्र सरकार और सोशल मीडिया मध्यस्थों को अवैध वीडियो लिंक पर सख्त निगरानी रखने को कहा गया है।

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