12 दिनों की जांच और काउंसलिंग के बाद बच्चों को घर भेजा गया
कटनी: 12 दिन की जांच के बाद घर लौटे 165 बच्चे; मानव तस्करी का शक निकला गलत, पुलिस की कार्यशैली पर खड़े हुए सवाल
जबलपुर| पश्चिम मध्य रेलवे के कटनी स्टेशन पर करीब दो सप्ताह पहले एक बड़ा 'रेस्क्यू ऑपरेशन' चलाया गया था। गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात करीब 2 बजे, प्रशासन ने सभी 165 बच्चों को सुरक्षा के साथ उनके गृह ग्राम के लिए रवाना कर दिया। बिहार के अररिया और सुपौल जिलों से ताल्लुक रखने वाले ये बच्चे महाराष्ट्र के मदरसों में तालीम हासिल करने जा रहे थे।
तस्करी नहीं, शिक्षा का था मामला
जब इन बच्चों को ट्रेन से उतारा गया था, तब पुलिस और बाल संरक्षण विभाग ने इसे मानव तस्करी का एक बड़ा गिरोह करार दिया था। इस सिलसिले में साथ चल रहे 8 शिक्षकों पर एफआईआर भी दर्ज की गई थी। हालांकि, 12 दिनों तक चली 'सामाजिक जांच रिपोर्ट' (Social Investigation Report) में यह खुलासा हुआ कि बच्चों के साथ कोई जबरदस्ती नहीं की गई थी और वे केवल पढ़ाई के उद्देश्य से जा रहे थे।
जीआरपी (GRP) थाना प्रभारी जी.एल. कश्यप ने पुष्टि करते हुए कहा:
"अब तक की विस्तृत जांच में मानव तस्करी से जुड़ा कोई भी ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। बच्चे मदरसे में शिक्षा ग्रहण करने जा रहे थे, जिसके बाद उन्हें वापस भेजने का निर्णय लिया गया।"
कानूनी नियमों की अनदेखी और 'वर्दी' पर विवाद
इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस के रवैये को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी जानकारों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) 2016 के तहत बच्चों से जुड़े मामलों में कुछ सख्त नियम हैं:
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सादे कपड़ों का नियम: कानूनन, बच्चों के रेस्क्यू या संरक्षण के समय पुलिस अधिकारियों को सादे कपड़ों में होना चाहिए ताकि बच्चे भयभीत न हों। लेकिन कटनी में पुलिसकर्मी पूरी वर्दी में बच्चों की घेराबंदी करते दिखे।
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संवेदनशीलता का अभाव: नियमों के मुताबिक हर थाने में एक विशेष 'बाल कल्याण पुलिस अधिकारी' होना अनिवार्य है। आरोप है कि कटनी में बच्चों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया, जिससे वे मानसिक रूप से सहम गए थे।
विभाग की किरकिरी और शिक्षकों का भविष्य
12 दिनों तक मासूमों को उनके माता-पिता से दूर रखने और बाद में मामला गलत पाए जाने पर पुलिस प्रशासन की काफी किरकिरी हो रही है। हालांकि बच्चों को घर भेज दिया गया है, लेकिन शिक्षकों पर दर्ज हुई एफआईआर को लेकर अभी भी कानूनी प्रक्रिया जारी है। जीआरपी का कहना है कि वे मामले के हर पहलू की सूक्ष्मता से जांच कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

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