सलामतपुर में रक्षाबंधन पर नियमों की धज्जियां: 52 सीटर बसों में ठूंसे 100 यात्री, गेट पर लटककर सफर करने को मजबूर लोग
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
रक्षाबंधन का पवित्र पर्व अपनों के पास पहुंचने की खुशी लेकर आता है, लेकिन इस बार सलामतपुर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों के लिए यह सफर बेहद खौफनाक और तकलीफदेह साबित हुआ। शुक्रवार को त्यौहार के अवसर पर भोपाल–विदिशा मार्ग पर चलने वाली यात्री बसों में सुरक्षा मानकों और यातायात नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। बसों में तिल रखने की जगह नहीं बची थी, फिर भी मुनाफाखोरी के चक्कर में बस संचालक क्षमता से दोगुनी-तीन गुनी सवारियां भरते रहे।
42 और 52 सीटर बसों में 100-100 सवारियां--मार्ग पर संचालित 42 और 52 सीटों की क्षमता वाली बसों में 60 से लेकर 100 तक यात्रियों को ठूंस-ठूंसकर भरा गया। बस की सीटें पूरी तरह भरने के बाद भी यात्रियों को बस के गलियारे (गैंगवे), दरवाजे और सीढ़ियों पर खड़ा कर दिया गया। स्थिति इतनी विकट हो चुकी थी कि कई युवा और पुरुष यात्री अपनी जान जोखिम में डालकर बस के गेट पर बाहर लटकते हुए सफर करने को मजबूर दिखे। तेज रफ्तार ओवरलोड बसों के लहराते हुए गुजरने से राहगीरों और अन्य वाहन चालकों के मन में भी बड़े हादसे की आशंका बनी रही।
महिलाओं, बुजुर्गों और मासूमों पर बीती आफत--इस अव्यवस्था और ओवरलोडिंग का सबसे बुरा असर महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों पर पड़ा। कड़कड़ाती धूप और उमस के बीच महिलाओं को घंटों गोद में मासूम बच्चों को लेकर खड़े-खड़े सफर करना पड़ा। बसों के अंदर पैर रखने तक की जगह न होने के कारण हवा का आवागमन बंद हो गया, जिससे कई यात्रियों का दम घुटने लगा और सांस लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस बदहाली और जानलेवा स्थिति के बावजूद बस कंडक्टरों द्वारा यात्रियों से पूरा किराया वसूलने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई।
रायसेन आरटीओ विभाग की मौन सहमति पर उठे सवाल--त्यौहारों के दौरान सड़कों पर उड़ती नियमों की धज्जियां रायसेन आरटीओ विभाग और यातायात पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। यात्रियों का आरोप है कि हर साल त्यौहारों पर यही मंजर देखने को मिलता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलने की जहमत नहीं उठाते। समय रहते ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार पर लगाम नहीं लगाई जा रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार विभाग को किसी बड़े और गंभीर हादसे का इंतजार है, जिसके बाद ही प्रशासनिक कागजी कार्रवाई और जांच के आदेश जारी होंगे।
इनका कहना है।
"रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्यौहार है, लेकिन सड़कों पर ओवरलोड बसों को देखकर लगता है कि प्रशासन को लोगों की जान की कोई परवाह नहीं है। 52 सीटर बस में 100 से ज्यादा लोगों को भरना और गेट पर यात्रियों का लटकना सीधे तौर पर हादसे को न्योता देना है। रायसेन आरटीओ और यातायात पुलिस को तत्काल मुख्य मार्गों पर चेकिंग अभियान चलाकर ऐसी ओवरलोड बसों के फिटनेस व परमिट निरस्त करने चाहिए। अगर जल्द ही सख्त कदम नहीं उठाए गए तो कोई बड़ा हादसा जन-धन की भारी हानि करा सकता है।"
कैलाश गोस्वामी, समाजसेवी, सलामतपुर
"त्यौहार के मौके पर भोपाल-विदिशा रूट पर बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए थी। बस संचालक यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाना किराया वसूल रहे हैं और सुविधाओं के नाम पर जान जोखिम में डाल रहे हैं। बसों में पैर रखने की जगह नहीं थी, महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर रोती-बिलखती सफर कर रही थीं। व्यापारिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी यह बेहद चिंताजनक है कि त्यौहारों पर आम नागरिकों को इस तरह की प्रताड़ना सहनी पड़ती है। प्रशासन को ओवरलोडिंग पर तुरंत भारी जुर्माना लगाना चाहिए।"
मयंक साहू, कपड़ा व्यापारी।






























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