खाद संकट: दो बार टोकन कटवाया, फिर भी नहीं मिला यूरिया; मुशकाबाद के किसान ने CM हेल्पलाइन में लगाई गुहार
-सांची के ग्राम मुशकाबाद का मामला: सोसाइटी में सिर्फ एक बोरी डीएपी दी जा रही, धान की फसल पर मंडराया संकट
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान को सहेजने में लगे किसान इस समय खाद की घोर किल्लत से जूझ रहे हैं। सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम मुशकाबाद से खाद वितरण प्रणाली में जारी भारी अव्यवस्था का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ के किसान शमीम खान ने आरोप लगाया है कि दो-दो बार टोकन की प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद उन्हें खेत के लिए बेहद जरूरी यूरिया खाद मुहैया नहीं कराई जा रही है।
"यूरिया बिना धान की फसल कैसे बचेगी?" – किसान का झझकोरता सवाल--पीड़ित किसान शमीम खान के अनुसार, वर्तमान में उनकी धान की फसल की बढ़वार और बेहतर पैदावार के लिए डीएपी के साथ-साथ यूरिया की नितांत आवश्यकता है। जब वे खाद वितरण केंद्र पहुँचे, तो समिति कर्मचारियों ने उन्हें यूरिया देने से साफ इनकार कर दिया और केवल एक बोरी डीएपी थमा दी।
किसान का दर्द: "धान की फसल को इस वक्त नाइट्रोजन पोषण की तुरंत जरूरत है। केवल डीएपी देने से फसल का विकास रुक जाएगा। अगर सरकारी सोसायटियों में यूरिया नहीं मिलेगा, तो एक छोटा किसान आखिर कहाँ भटकेगा?"
सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत, प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग--सोसाइटी के चक्कर काटकर परेशान हो चुके किसान शमीम खान ने अंततः राज्य सरकार की मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर अपनी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने प्रशासन को अवगत कराया कि खाद मिलने में हो रही देरी का सीधा असर उनकी पूरी फसल की सेहत और उत्पादन पर पड़ेगा।किसान ने जिला प्रशासन व कृषि विभाग के आला अधिकारियों से मांग की है कि टोकन व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जाए।
यूरिया की पर्याप्त और पारदर्शी उपलब्धता तत्काल सुनिश्चित की जाए।फसलों को बर्बादी से बचाने के लिए किसानों को समय पर पूरा खाद मिले।
धान की फसल के लिए क्यों जरूरी है समय पर खाद--कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान के पौधों में कल्ले फूटने और वानस्पतिक वृद्धि के शुरुआती 30 से 40 दिन बेहद संवेदनशील होते हैं। इस चरण में यूरिया में मौजूद नाइट्रोजन पौधों को हरा-भरा रखने और सही पोषण देने के लिए अनिवार्य होता है। खाद आपूर्ति में जरा सी भी देरी किसानों के हफ्तों के परिश्रम और मेहनत पर पानी फेर सकती है।






























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