3.47 करोड़ का भ्रष्टाचार, हलाली डेम पर महीना भर भी नहीं टिक सकी RCC सड़क, उखड़ी गिट्टियां हुए जानलेवा गड्ढे
-स्थानीय रहवासियों और राहगीरों ने ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
जल संसाधन विभाग की देखरेख में सम्राट अशोक सागर बांध (हलाली डेम) की पिच पर बनी बहुचर्चित आरसीसी सड़क ने पहले ही महीने में घटिया निर्माण और प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। करीब 3 करोड़ 47 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुई यह सड़क निर्माण के महज 30 दिनों के भीतर ही जर्जर अवस्था में पहुंच गई है। गिट्टियां पूरी तरह उखड़ चुकी हैं और सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे उभर आए हैं। आलम यह है कि करोड़ों की लागत से बना यह मार्ग अब राहगीरों के लिए सहूलियत की बजाय हादसों का सबब बन चुका है।
राहगीर परेशान, वाहनों को हो रहा भारी नुकसान---हलाली डेम का यह मार्ग आसपास के ग्रामीण इलाकों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख संपर्क मार्ग है। सड़क पर हुए गहरे गड्ढों के कारण यहां से गुजरने वाले वाहन चालक हर पल दुर्घटना की आशंका से जूझ रहे हैं।गड्ढों के कारण दोपहिया और चार पहिया वाहनों के सस्पेंशन, टायर और रिम को भारी नुकसान पहुंच रहा है।रात के अंधेरे और बारिश के दौरान इन गड्ढों का पता न चलने से कई वाहन चालक अनियंत्रित होकर गिर रहे हैं।स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा व्याप्त है। गुस्साए ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस घटिया निर्माण पर ठेकेदार और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
तकनीकी गुणवत्ता और सरकारी निगरानी पर उठे गंभीर सवाल--3.47 करोड़ की लागत से बनने वाली आरसीसी सड़क का एक महीने में उखड़ जाना निर्माण की गुणवत्ता पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आरसीसी सड़कों को टिकाऊ और मजबूत माना जाता है, लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही और ठेकेदार की मनमानी ने इस परियोजना की साख बिगाड़ दी है।गुणवत्ता जांच में लापरवाही के कारण सामने आ रहे हैं जैसे कि क्या सड़क निर्माण के दौरान इस्तेमाल की गई सीमेंट, कंक्रीट और गिट्टी की लैब टेस्टिंग कराई गई थी? निर्माण के वक्त जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार तकनीकी अधिकारी और सब-इंजीनियर कहां थे?
बारिश का बहाना या भ्रष्टाचार? ठेकेदार पक्ष द्वारा बारिश के पानी को मुख्य वजह बताना कितना जायज है, जबकि आरसीसी सड़कें पानी के प्रभाव को सहने के लिए ही बनाई जाती हैं? स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और जनता के पैसों की बर्बादी करने वाले ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
विभागीय सफाई बनाम ठेकेदार के बहाने: किसने क्या कहा?
मामला तूल पकड़ने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों के विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं:
"रोड अभी अंडर कंस्ट्रक्शन है"
"हलाली डेम की पिच के ऊपर और नीचे बने रोड की कुल लागत ₹3.47 करोड़ है। सड़क अभी निर्माणाधीन (अंडर कंस्ट्रक्शन) की श्रेणी में है। जो भी गड्ढे या खराबी आई है, उसे ठेकेदार द्वारा नियम अनुसार ठीक करके दिया जाएगा।"
बृजेश बगुलिया, एसडीओ, जल संसाधन विभाग।
"घटिया सामग्री का प्रयोग, ठेकेदार पर हो कार्रवाई"
"हलाली डेम की पिच पर बने सीसी रोड के निर्माण में बहुत ही घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। यही वजह है कि सड़क बनने के एक महीने के अंदर ही पूरी तरह बदहाल हो गई। इतने बड़े पैमाने पर हुई धांधली के लिए संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"
शफीक खान, उपसरपंच ग्राम पंचायत मुड़ियाखेड़ा।
"बारिश के पानी को बताया वजह"
"सड़क की ऊपर पिच पर बारिश का पानी जमा होने के कारण कुछ जगह गड्ढे हो गए हैं। निर्माण कार्य पूरा होने से पहले इन्हें दुरुस्त कर दिया जाएगा।"
रोहित शर्मा, कर्मचारी (ठेकेदार)






























MP में सेवा संकल्प अभियान का बड़ा प्लान तैयार, अधिकारियों को जिलावार जिम्मेदारियां सौंपी गईं
‘हनुमान अंश’ की विदेशों में भी धूम, नॉर्थ अमेरिका में रिलीज से पहले ही करीब 1 करोड़ की कमाई
खुदरा खरीद से सोने की कीमतों में तेजी, तीन दिन की गिरावट का सिलसिला टूटा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को लेकर रखी सरकार की सोच, समृद्धि पर दिया जोर
बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी खबर, 11 सितंबर से लगातार तीन दिन बैंकिंग सेवाएं रहेंगी प्रभावित
नाबालिग लड़की के उत्पीड़न पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश
सेबी प्रमुख का बड़ा बयान, एआई से बदल सकती है शेयर बाजारों के कामकाज की तस्वीर
‘टकराव नहीं, सहयोग जरूरी’, अंतरराष्ट्रीय मंच से PM मोदी ने दिया दुनिया को बड़ा संदेश
सरकारी जमीन पर चला बुलडोजर, भोपाल में 15 करोड़ की जमीन कराई अतिक्रमण मुक्त