-गिद्धोंदेश का अग्रणी ‘‘गिद्ध राज्य‘‘ है हमारा मध्यप्रदेश- मुख्यमंत्री डॉ यादव

-प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण के लिए हो रहे हैं ऐतिहासिक कार्य- मुख्यमंत्री डॉ.यादव

-मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री जैसे नवाचारों से बढ़ रही है गिद्धों की संख्या

अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा सोमवार को रायसेन जिले में हलाली डैम के समीप लुप्तप्राय प्रजाति के 05 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। इनमें चार भारतीय गिद्ध (जिप्स इंडिकस) और एक सिनेरियस गिद्ध (एजिपीयस मोनाकस) शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में वन्य जीव संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कार्य हो रहे हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गिद्धों का संरक्षण न केवल जैव विविधता की रक्षा के लिए आवश्यक है, अपितु पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दृष्टि से भी अनिवार्य है। प्रदेश में गिद्ध संरक्षण को भी नई दिशा दी जा रही है। यह पहल प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अत्यंत कदम है जो संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण तथा परिस्थितिक संतुलन को सुदृढ़ करने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। 

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि पर्यावरण पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं, साथ ही बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। राज्य सरकार ने गिद्धों सहित अन्य पशु पक्षियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए सतत प्रयास किए हैं। एशिया से लुप्त हो रहे चीतों के पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दक्षिण अफ्रीका के देशों से चीते लाकर कूनो अभ्यारण में उनका संरक्षण एवं संवर्धन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्राकृतिक वातावरण में छोड़े गए गिद्धों पर जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं, जिससे उनके आवागमन, व्यवहार एवं सुरक्षा की सतत निगरानी सुनिश्चित की जा सके। 

इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) शुभरंजन सेन ने जानकारी देते हुए बताया कि उच्च परिशुद्धता वाले जीपीएस-जीएसएम उपग्रह ट्रांसमीटरों से सुसज्जित इन पाँच दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में व्यवस्थित अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया गया है। टैगिंग प्रक्रिया सभी संबंधित संस्थाओं एवं वन विभाग के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में वाइल्ड लाइफ एसओएस के वन्यजीव पशु चिकित्सक की देखरेख में हुई। यह पहल मध्यभारत के विकसित होते ‘गिद्ध परिदृश्य’ को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जहाँ भारतीय गिद्ध सामान्यतः एक ही क्षेत्र में रहते हैं, वहीं सिनेरियस गिद्ध मध्य एशियाई फ्लाईवे के अंतर्गत लंबी दूरी का प्रवास करते हैं, जो 30 से अधिक देशों तक फैला विश्व का एक प्रमुख प्रवासी पक्षी गलियारा है। इस अवसर पर सांची विधायक डॉ प्रभुराम चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंत मीणा, सांची जनपद अध्यक्ष अर्चना पोर्ते, एचयू खान प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबंध संचालक वन विकास निगम, कलेक्टर अरूण कुमार विश्वकर्मा, पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता, डीएफओ प्रतिभा शुक्ला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

पर्यावरण पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं गिद्ध---पर्यावरण पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं, साथ ही बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है। प्रदेश में भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर), सिनेरियस गिद्ध (ब्लैक वल्चर), मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर वल्चर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। 

देश का अग्रणी ‘‘गिद्ध राज्य‘‘ है मध्यप्रदेश---मध्यप्रदेश देश का अग्रणी ‘‘गिद्ध राज्य‘‘ है, जहां वर्ष 2025 में गिद्धों की आबादी 12710 पाई गई। यह पहल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश में गिद्ध संरक्षण को सुदृढ़ करने प्राकृतिक पारितंत्र की स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखने और राज्य की समृद्ध प्राकृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी। 

गिद्धों की गतिविधियों और निगरानी हेतु उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम---पक्षी संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से गिद्धों की गतिविधियों और निगरानी के लिए उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम प्रारंभ किया है। टेलीमेट्री से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से गिद्धों के भूदृश्य उपयोग, आवागमन पैटर्न और मानव-जनित दबावों के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। इससे प्रमुख पड़ाव स्थलों और भोजन क्षेत्रों की पहचान, संरक्षित एवं मानव-प्रधान क्षेत्रों में उनकी पारिस्थितिकी को समझने तथा बिजली के झटके, विषाक्तता और आवास क्षरण जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिल रही है। इस प्रक्रिया में संग्रहित वैज्ञानिक प्रमाण अधिक प्रभावी खतरा-निवारण रणनीतियाँ विकसित करने और सीमा-पार सहयोग सहित भूदृश्य स्तर पर संरक्षण योजनाओं को सशक्त बनाने में सहायक होंगे। मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री से गिद्ध संरक्षण की एकीकृत डेटा-आधारित एवं भूदृश्य-स्तरीय  संरक्षण का पारस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है। इससे लुप्तप्राय गिद्ध प्रजातियों का संरक्षण होगा और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रहरी के रूप में उनकी भूमिका भी दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित होगी।

सिनेरियस और लॉन्ग-बिल्ड प्रजाति के हैं गिद्ध---रायसेन जिले के हलाली डैम के समीप मुख्यमंत्री डॉ यादव द्वारा सोमवार को 5 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। इनमें एक सिनेरियस गिद्ध जिसे विदिशा से रेस्क्यू किया गया था, उस समय इसकी आयु लगभग डेढ़ वर्ष थी। सिनेरियस गिद्ध जिसे काला गिद्ध भी कहा जाता है, यह विश्व के सबसे बड़े और भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है। यह मुख्यतः यूरेशिया क्षेत्र में पाया जाता है तथा भारत में शीतकालीन आंगतुक के रूप में उत्तर भारत के राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों के क्षेत्रों में देखा जाता है। इसी प्रकार वर्ष 2025 में 4 लॉन्ग-बिल्ड गिद्धों को विदिशा, मण्डला, बैतूल एवं सिवनी जिलों के विभिन्न स्थानों से रेस्क्यू कर वन विहार लाया गया था, जिसकी आयु उस समय लगभग एक वर्ष थी। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान द्वारा इन सभी गिद्धों को वैज्ञानिक देखरेख में उपचार, पुर्नवास एवं स्वास्थ्य मूल्यांकन कराया गया! जिसके पश्चात इन्हें रीवाइल्डिंग के लिए उपयुक्त पाया गया।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28