अदनान खान, सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

​मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश, जिला कलेक्टर के फरमान, राज्यमंत्री की चेतावनियों और पशु चिकित्सा विभाग के दावों के बावजूद सड़कों पर बैठने वाले मवेशियों की समस्या जस की तस बनी हुई है। रायसेन जिले के सलामतपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से गुजरने वाले नेशनल हाइवे 146 और स्टेट हाइवे 18 पर बेसहारा और पालतू मवेशियों का जमघट लगा रहता है। प्रशासन की घोर लापरवाही और मवेशी मालिकों की गैर-जिम्मेदारी के कारण बेजुबान जानवर आए दिन तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर काल के गाल में समा रहे हैं, वहीं राहगीर भी गंभीर हादसों का शिकार हो रहे हैं।

हाइवे पर 'ब्लैक स्पॉट्स' बने ये इलाके--भोपाल विदिशा स्टेट हाइवे 18 और एनएच 146 पर बालमपुर घाटी से लेकर भदभदा, देहरी, दीवानगंज, कुल्हाड़िया, बेरखेड़ी चौराहा, सलामतपुर, त्रिमूर्ति चौराहा, ढकना चौराहा और आमखेड़ा तक सड़कों के ठीक बीचों-बीच दर्जनों मवेशियों का झुंड दिन-रात जमा रहता है। दिन के समय सड़कों पर पशुओं के जमावड़े के कारण कई-कई घंटों तक जाम जैसे हालात निर्मित हो जाते हैं। वहीं, रात के समय अंधेरा होने के कारण वाहन चालकों को सड़क पर बैठे मवेशी दिखाई नहीं देते, जिससे तेज रफ्तार वाहन सीधे इनसे टकरा जाते हैं। इन हादसों में कई बाइक सवार घायल हो चुके हैं और कई बेजुबान गायों की मौके पर ही मौत हो चुकी है।

कागजी साबित हो रहे सरकारी आदेश और योजनाएं--कुछ समय पूर्व मध्यप्रदेश शासन के राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने स्पष्ट कहा था कि मवेशियों को खुला छोड़ने वाले पशुपालकों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके अलावा ग्राम पंचायतों के माध्यम से 'डोंडी' पिटवाकर मुनादी कराने और पशु मालिकों को चेतावनी देने के निर्देश भी जारी किए गए थे।रायसेन जिले में सुरक्षा और पेट्रोलिंग के लिए 4 प्रमुख सेक्टर भी गठित किए गए थे जिनमें बिलखिरिया से टोल नाका सेहतगंज, औबेदुल्लागंज, मंडीदीप से टोल नाका विशनखेड़ा, सुल्तानपुर जोड़ से खरगोन टोल नाका हरसिली ​खरगोन से देवरी उदयपुरा। दावा किया गया था कि पेट्रोलिंग गाड़ियां सड़कों पर मिलने वाले मवेशियों को तत्काल गौशालाओं या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएंगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन दावों और योजनाओं का असर सड़कों पर शून्य नजर आ रहा है।

जमीनी अमल की दरकार--सरकारी कागजों में नियम-कायदे और पेनल्टी का प्रावधान होने के बावजूद धरातल पर क्रियान्वयन न होना प्रशासनिक तंत्र की उदासीनता को दर्शाता है। अगर समय रहते ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं और पुलिस प्रशासन ने मिलकर मवेशी मालिकों पर सख्त रवैया नहीं अपनाया, तो हाइवे पर इंसानी जिंदगियों और बेजुबान पशुओं की बलि का यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है।​

जनता का दर्द: आखिर कौन है इस लापरवाही का जिम्मेदार?

​"गौशालाएं बनीं, फिर भी सड़कों पर मौत बांट रहे मवेशी"

"सांची जनपद क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में गौशालाओं का निर्माण कार्य कागजों और इमारतों तक पूरा हो चुका है। इसके बावजूद पशु सड़कों पर ही बैठे रहते हैं और हादसों का शिकार होते हैं। सरकार आदेश देती है कि पशु मालिकों पर कार्रवाई होगी, लेकिन इतने हादसे होने के बाद भी आज तक किसी एक दोषी पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई। आखिर इस व्यवस्था का जिम्मेदार कौन है?"

मूलचंद यादव, पूर्व सरपंच, ग्राम पंचायत सुनारी सलामतपुर।

"पुलिस माइक से मुनादी कराए, तभी सुधरेंगे पशुपालक"

"भोपाल-विदिशा मार्ग पर हादसे रोजाना की बात हो गए हैं। सलामतपुर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस प्रशासन को खुद माइक से एनाउंसमेंट (मुनादी) करवाकर पशुपालकों को चेतावनी देनी चाहिए कि मवेशियों को घरों में बांधकर रखें। जब तक मवेशी मालिकों के खिलाफ सीधी और सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वे नहीं मानेंगे और बेगुनाह लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे।"

पंडित अशोक त्रिपाठी, समाजसेवी रातातलाई, सलामतपुर।

 

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28