-कमर्शियल वाहनों से लाखों रुपए टोल टैक्स वसूलने के बाद भी नही हो रहा पेंचवर्क

-एमपीआरडीसी के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं वाहन चालक

-भोपाल विदिशा स्टेट हाइवे 18 स्तिथ सलामतपुर रेलवे फाटक पर बनाया गया है ओवरब्रिज

-1 किमी लंबे ब्रिज से रोज निकलते हैं 10 हजार से अधिक वाहन, गड्ढों के कारण आए दिन हो रही हैं दुर्घटनाएं

अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

भोपाल-विदिशा स्टेट हाइवे 18 स्तिथ सलामतपुर रेलवे फाटक पर बनाया गए रेलवे ओवरब्रिज में हुए 8-8 इंच गहरे गड्ढों की वजह से वाहन चालक अपनी जान गवां रहे हैं। इतना सब होने के बाद भी ज़िम्मेदार एमपीआरडीसी विभाग के अधिकारी इस और ध्यान नही दे रहे हैं। जबकि गड्ढों के कारण ब्रिज पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। अभी ताज़ा मामला कुछ महीने पहले का ही है जब मेढ़की गांव की एक महिला शशि बाई शर्मा पत्नी रामगोपाल शर्मा मोटरसाइकिल पर बैठकर अपने घर मेढ़की जा रही थी। तभी मोटरसाइकिल का अगला पहिया ओवरब्रिज के गड्ढों में चला गया और मोटरसाइकिल गिर गई। इसी दौरान एक तेज़ रफ़्तार कार ने शशि बाई शर्मा को टक्कर मारकर उड़ा दिया। उनका तीन दिन तक गंभीर हालत में भोपाल के एम्स अस्पताल में ईलाज चला और उनकी मौत हो गई। बीते 6 से 7 सालों में लगभग 12 से अधिक लोग रेलवे ओवरब्रिज के गड्ढों की वजह से अपनी जान गवां चुके हैं। अभी बारिश के मौसम में तो ओवरब्रिज पर गड्ढों की भरमार हो गई है। चारों तरफ सिर्फ गड्ढे ही गड्ढे नज़र आ रहे हैं। और तो और ब्रिज पर कई जगह लोहे के सरिये भी बाहर निकल आए हैं।

2013 में बनकर तैयार हुआ था रेलवे ओवरब्रिज--इस ब्रिज का निर्माण वर्ष 2011 में मध्य प्रदेश ब्रिज कारपोरेशन द्वारा 6 करोड़ की लागत से कराया गया था। यह ब्रिज 2013 में बनकर तैयार हुआ था। अपने बनने के साथ ही यह विवादों में आ गया था। ब्रिज कारपोरेशन के तत्कालीन एसडीओ जो अब सेवानिवृत हो चुके हैं को आपत्ति थी की जिस एरिया में ब्रिज बनाया जा रहा है। वह क्षेत्र ब्लैक कॉटन स्वाइल क्षेत्र है। ब्रिज के पिलर की गहराई कम रखी गयी है। पुल धीरे धीरे धसक जाएगा। लेकिन ब्रिज बना रहे ठेकेदार जो तत्कालीन केंद्रीय मंत्री के खासम खास थे के ऊँचे रसूख के चलते तत्कालीन एसडीओ की नही सुनी गई तो उन्होंने दुखी होकर अपना स्थानांतरण करा लिया था। पिछले 11 सालों में एमपीआरडीसी कई बार रेलवे ओवरब्रिज की मरम्मत करा चुकी है। लेकिन अब फिर ब्रिज में गहरे गड्ढे होने के साथ ही दोनों और कि रैलिंग भी टेढ़ी होकर धसक रही है। आलम यह है की ब्रिज पर इतनी दुर्घटना होने लगी हैं कि कई झोलाछाप डॉक्टरों व अस्पतालों ने तो ब्रिज पर लिखवा दिया है की दुर्घटना होने पर संपर्क करें। 

इस ब्रिज से रोज ही कोई न कोई वीआईपी गुजरता है---सप्ताह में एक बार केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी विदिशा इसी रेलवे ओवरब्रिज से निकलते हुए जाते हैं। वहीं प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा यहीं से आना जाना करते रहते हैं। और प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी के विधानसभा क्षेत्र में आता है यह रेलवे ओवरब्रिज। उसके बाद भी अधिकारियों द्वारा इस और कोई भी ध्यान नही दिया जा रहा है।

कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना---यह ब्रिज दिल्ली मुम्बई मेन रेलवे ट्रैक के उपर बना हुआ है। जिस पर से हर चार मिनिट में ट्रेन निकलती हैं। किसी दिन कोई वाहन दुर्घटना ग्रस्त होकर नीचे से निकल रही ट्रेन पर गिर सकता है। जिससे बड़ी दुर्घटना होने से इंकार नही किया जा सकता। अब तो खतरा और बढ़ गया है क्योंकि ब्रिज की रेलिंग ही धसक कर आड़ी हो गई है। इतना सब होने के बाद भी एमपीआरडीसी विभाग के अधिकारी गैरज़िम्मेदाराना रवैया अपनाए हुए हैं।

बड़ी हुई दरों के साथ टोल टैक्स वसूलने के बाद भी नही हो रहा पेंचवर्क----भोपाल विदिशा स्टेट हाइवे 18 पर आरएमएन टोल टैक्स प्रायवेट लिमिटेड द्वारा 1 सितंबर से टोल टैक्स की दरों में बढ़ोत्तरी कर दी गई है। जिसमें हल्के कमर्शियल वाहन से 65 रुपये, खाली या भरे हुए ट्रक से 165 रुपए तो वहीं मल्टी एक्सल वाहन से 325 रुपए वसूल रहे हैं। बावजूद इसके हाइवे रोड पर मरम्मत नही कराई जा रही है। जबकि रोड पर गहरे गड्डों की वजह से आए दिन दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन एमपीआरडीसी का गैरज़िम्मेदाराना रवैया लोगों की मुसीबत बना हुआ है।

रेलवे ओवरब्रिज में बड़ रहा है गेप---खोहा के सरपंच कालूराम मीणा ने बताया की रेलवे ओवरब्रिज की सड़क के बीच में 8-8 इंच तक गहरे गड्ढे फिर से हो गए हैं। और पुल धीरे धीरे धसक रहा है। और गड्डों में वाहन का टायर फंस जाता है। यात्रियों की मोटरसाईकिल भी कई बार गड्डों में फंस चुकी है। ग्राम गाडरखेड़ी के यशवंत राजपूत, सलामतपुर के कैलाश गोस्वामी, अशोक त्रिपाठी, मयंक साहू, दीपक अहिरवार, हसन मंसूरी आदि का कहना है कि पुल के निर्माण में लापरवाही बरती गई है। समय रहते ध्यान नही दिया गया तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

इनका कहना है।

रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य घटिया स्तर का किया गया था। जिसकी वजह से कुछ साल में ही रेलवे ओवर ब्रिज में जगह जगह 8-8 इंच तक गहरे गड्ढे हो गए हैं और रेलिंग भी धसक कर आड़ी हो गई है। इसी कारण ब्रिज पर आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। यहां पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

रघुवीर सिंह मीणा, सरपंच ग्रापं. रातातलाई।

सलामतपुर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण 2013 में हुआ था। लेकिन ब्रिज बनने के कुछ समय बाद ही ब्रिज में दरारें आ गईं थी। यह ब्रिज भोपाल-विदिशा स्टेट हाइवे 18 पर बना है। इस मार्ग पर यातायात का बहुत अधिक दवाब रहता है। ब्रिज के दोनों और की रैलिंग पूरी तरह से छतिग्रस्त हो गई है। वहीं गड्डों में बाइक का टायर घुस जाता है। जिसकी वजह से चालक गिर कर घायल हो रहे हैं।

हमजा जाफरी, पूर्व उपसरपंच सलामतपुर।

में जब भी सलामतपुर से भोपाल मोटरसाइकिल से जाता हूं। तो इसी रेलवे ओवरब्रिज से निकलता हूं।ब्रिज पर बड़े-बड़े गड्ढे होने के साथ ही साइडों से ब्रिज टूट गया है। और रेलिंग भी झुक गई है। यहां से निकलने में जान का खतरा लगता है कि कहीं ये ब्रिज गिर ना जाए। इसके घटिया निर्माण के जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई होना चाहिए।

साजिद खान, सलामतपुर।


न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28