अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

हलाली डैम के पिच पर बने मार्ग की हालात दिनों दिन बदतर होती जा रही है। सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढों के कारण आए दिन वाहन चालक परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस मार्ग से बैरसिया होते हुए रायसेन और विदिशा के लिए बसें प्रतिदिन गुजरती हैं, वहीं भोपाल की ओर जाने वाली यात्री बसें भी इसी रास्ते से होकर निकलती हैं। गड्ढों की वजह से बसों और अन्य वाहनों के पलटने या टकराने का खतरा लगातार बना हुआ है।स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार विभाग ने अब तक इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया है। वहीं, हलाली डैम पर रोजाना सैकड़ों पर्यटक भी घूमने आते हैं और खराब सड़क उनकी परेशानी को और बढ़ा देती है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क पर बने गड्ढों को जल्द से जल्द भरवाया जाए ताकि कोई बड़ा हादसा टाला जा सके।

हलाली डेम पर 24.59 करोड़ रुपए की लागत से 5 गेटों का हुआ है निर्माण --ओवरफ्लो वाले स्थान पर पहले 9 मीटर ऊंचाई और 5 मीटर चौड़ाई के पिलरों के बीच में पांच गेट लगा दिए गए हैं। डेम का जल स्तर बढ़ने से इन गेटों से 1750 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। इससे 28 गांवों के लगभग 2100 किसानों की 2400 हेक्टेयर जमीन में बोई गई खरीफ की फसल सहित अन्य फसलों को डूबने से बचाया जा सकता है।इतना ही नहीं फसल के अलावा नीनोद और कायमपुर गांव के रास्ते डूब में आ जाने से गांव टापू बन जाया करते थे। अब इन गांवों के रास्ते भी डूब में नहीं आते हैं। इससे बारिश के दिनों में यहां से आवागमन भी चालू रहता है। बारिश के दिनों में भी इलाज सहित आवश्यक सेवाएं दोनों गांव के रहवासियों को आसानी से उपलब्ध हो रही है।

ग्रामीणों के आवागमन के लिए डाउन स्ट्रीम में बना 57.50 मीटर लंबा ब्रिज--गेट के आगे डाउन स्ट्रीम में एक 57.50 मीटर लंबा ब्रिज भी बनाया गया है। इससे 15-20 गांवों के लोगों को बाढ़ के दौरान हर साल रास्ता बंद होने की समस्या से भी निजात मिल जाएगी। दरअसल बारिश के दौरान बाढ़ से नीनोद और कायमपुर गांव के रास्ते डूब में आ जाने के कारण गांव टापू बन जाया करते थे। बांध के डाउन स्ट्रीम में ब्रिज बनने से अब इन गांवों के रास्ते भी डूब में नहीं आएंगे। इससे बारिश के दिनों में यहां से आवागमन चालू रहता है। ग्रामीणों को इसी रास्ते से आवागमन करना रहता है, जबकि बांध पर निर्मित गेटेड स्लिप के ब्रिज का इस्तेमाल केवल सिंचाई विभाग का अमला ही कर सकता है। यह अमला इस ब्रिज का उपयोग बांध के गेटों का नियंत्रण के कार्य के लिए करेगा। लेकिन हलाली डैम के पिच पर बने मार्ग की हालात दिनों दिन बदतर होती जा रही है। सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढों के कारण आए दिन वाहन चालक परेशानी का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र ही समस्या का समाधान किया जाए।

इनका कहना है।

हलाली डैम के पिच पर बने मार्ग की हालात दिनों दिन बदतर होती जा रही है। सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढों के कारण आए दिन वाहन चालक परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस मार्ग से बैरसिया होते हुए रायसेन और विदिशा के लिए बसें प्रतिदिन गुजरती हैं। यहां से बसें यात्रियों की जान जोखिम में डालकर बिना कोई सुरक्षा इंतेज़ाम के निकलती हैं। इस मार्ग को शीघ्र ही पक्का किया जाए।

कालूराम मीणा, सरपंच ग्रा. पं. खोहा।

ओवरफ्लो वाली जगह पर पानी रोकने के लिए 5 गेट तो लगा दिए गए हैं। लेकिन यात्रियों की जान खतरे में डालते हुए बसें बिना सुरक्षा के खतरनाक मार्ग से गुजर रही हैं। रास्ते के दोनों और 100-100 फिट गहरी खाई हैं। जहां पर कभी भी बड़ा हादसा होने की संभावना है।

शफीक खान, मुड़ियाखेड़ा।

लगभग 25 करोड़ की लागत से 5 गेटों का निर्माण हलाली बांध पर किया गया है। लेकिन आवागमन का रास्ता पथरीला और कच्चा ही छोड़ दिया गया है। इसी खतरनाक रास्ते से प्रतिदिन सैंकड़ों यात्री बैरसिया की और बसों व अन्य साधनों से जाते हैं। शासन प्रशासन से कई बार मामले की शिकायत की गई है। परंतु अभी तक कोई सुनवाई नही हुई है।

हसन मंसूरी, सलामतपुर।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28