हिन्दू सम्मेलन में जामवंत बनकर जागृत हुआ मेहगांव: हनुमान की तरह छलांग लगाने का संकल्प
-मेहगांव में आयोजित हुआ भव्य हिन्दू सम्मेलन, बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल
-मुख्य मार्गों से निकली कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुआ कार्यक्रम
-पूरा कस्बा भगवा झंडों से हुआ धर्ममय, कई दिनों से चल रही थीं तैयारियां
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
मंगलवार को सकल हिन्दू समाज के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बालाजी धाम प्रांगण मेहगांव में भव्य हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया। जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और सनातन धर्म के अनुयायी शामिल हुए। इस दौरान मंडल मेहगांव उमरिया कस्बे सहित रायसेन, सुनारी सलामतपुर, रातातलाई, बेरखेड़ी चौराहा, दीवानगंज, त्रिमूर्ति चौराहा, बालमपुर, अम्बाडी, सेमरा, ग्राम बरौला, बराईखास, तिजालपुर , खामखेड़ा, रतनपुर, मेढ़की, कटसारी, भोई कालोनी, भगवंतपुर, बहेडिया, पगनेश्वर के सैंकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। सम्मेलन से सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया गया। पूरे मेहगांव में धार्मिक माहौल और उत्साह बना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक कलश यात्रा से शुरू हुई। इसमें मातृशक्ति, युवा वर्ग और श्रद्धालु भक्ति भाव से शामिल हुए। पूरे कस्बे में भगवा झंडे लहराए गए ओर जयघोष की गूंज से वातावरण धर्ममय हो गया। हिन्दू सम्मेलन में मुख्य वक्ता लखन विश्वकर्मा प्रचारक, संत मणिराम दास महाराज और साध्वी गिरजा दीदी का उद्बोधन प्राप्त हुआ।
समाज को सामाजिक एकता,सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभक्ति का शंखनाद--मुख्य वक्ताओं ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इस पवित्र भूमि का पूजन करते हुए मुझे रामायण का वह ऐतिहासिक प्रसंग याद आ रहा है, जब विशाल समुद्र के तट पर पूरी वानर सेना असमंजस में बैठी थी। हर कोई चुप था, हर कोई सहमा था। यहाँ तक कि स्वयं महावीर हनुमान जी भी चुपचाप एक कोने में बैठे थे। उनके पास असीम बल था, वो उड़ सकते थे, वो पर्वतों को उठा सकते थे, लेकिन उस क्षण वो अपनी ही शक्तियों को भूल चुके थे। तब जामवंत जी ने आगे बढ़कर उन्हें झकझोरा और याद दिलाया। का चुप साधि रहा बलवाना। पवन तनय बल पवन समाना। आज वही स्थिति हमारे हिंदू समाज की है। हम हनुमान जी की तरह अपनी शक्ति भूल बैठे हैं जिसने पूरी दुनिया को सभ्यता, संस्कार और विज्ञान का पाठ पढ़ाया। हम भूल गए हैं कि हम उन महापुरुषों की संतान हैं जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी, लेकिन कभी शीश नहीं झुकाया। आज हमें भी एक 'जामवंत' की जरूरत है जो हमें हमारी एकता और हमारे पराक्रम की याद दिला सके।यह हिंदू सम्मेलन वही 'जामवंत' है। यह सम्मेलन आपको याद दिलाने आया है कि, आप महा पराक्रमी हैं। आप बिखरे हुए तिनके नहीं, आप एक अटूट जंजीर हैं। जिस तरह जामवंत के याद दिलाते ही हनुमान जी ने हुंकार भरी थी और एक छलांग में समंदर लांघ दिया था, ठीक उसी तरह आज इस भूमि पूजन के साक्षी बन रहे आप सभी को जागना होगा। हमें संकल्प लेना होगा कि: हम जाति-पाति के छोटे दायरों से ऊपर उठकर 'केवल हिंदू' बनकर जिएंगे।हम अपनी संस्कृति और मर्यादाओं की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। हम आने वाली पीढ़ियों को यह गर्व करना सिखाएंगे कि हिंदू होना सौभाग्य की बात है। आज इस भूमि पर किया गया यह पूजन केवल एक औपचारिक अनुष्ठान नहीं है, यह हमारे संगठित होने का शंखनाद है। आइए, अपने भीतर के उस 'हनुमान' को जगाएं और पूरी दुनिया को बता दें कि हिंदू समाज अब जाग चुका है
