-अभी मरीजों को जांच के लिए जाना पड़ता था 25 किमी दूर सांची सिविल अस्पताल

-5 साल से स्वास्थ्य केंद्र में थी मशीन की आवश्यकता, सांची सीबीएमओ के प्रयासों से मिली ट्रूनेट मशीन

अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सलामतपुर को टीबी की जांच में आवश्यक ट्रूनेट मशीन मिलने से 42 गांवों के मरीज़ों की जांच अब आसानी के साथ अस्पताल में ही हो जाएगी। अभी दीवानगंज, गीदगढ़ क्षेत्र के मरीज़ों को टीबी की जांच कराने के लिए 25 किलोमीटर दूर सांची सिविल अस्पताल जाना पड़ता था। वहां भी मरीज़ों की संख्या अधिक होने से जांच के लिए गए मरीज़ों को घंटों इंतेज़ार करना पड़ता था। ट्रूनेट मशीन सांची सीबीएमओ डॉ रवि राठौर के प्रयासों के चलते अस्पताल को उपलब्ध हुई है। मशीन के लिए ल्युपिन फाउंडेशन आगे आया और साढ़े सात लाख रुपये कीमत की मशीन स्वास्थ्य केंद्र को भेंट की है। इस दौरान ल्युपिन कंपनी के डीजीएम अनिल वर्गीस, सीएसआर मैनेजर सुशील डोंगसिरवार, एग्जेक्युटिव इंजीनियर मोलबीओ शुभांशु चौरसिया, एसटीएलएस केशव रघुवंशी, एसटीएस प्रशांत चक्रवर्ती और सांची सीबीएमओ डॉ रवि राठौर और अस्पताल स्टॉफ मौजूद रहा।

अभी 13 टीबी मरीज़ों का चल रहा है ईलाज--सलामतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आसपास क्षेत्र के 13 टीबी मरीज़ों का ईलाज चल रहा है। इससे पहले भी लगभग 15 मरीज ईलाज कराने के बाद स्वस्थ होकर खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वर्तमान टीबी मरीज़ों को निरंतर दवाएं और पोषण आहार समय पर उपलब्ध कराया जा रहा है। ताकि वह जल्द स्वस्थ होकर जीवन व्यतीत कर सकें।

इन गांवों को मिलेगा फायदा--सलामतपुर प्रथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ट्रूनेट मशीन आने से लगभग 42 गांवों के मरीज़ों को फायदा मिलेगा। इनमें दीवानगंज, सेमरा, अम्बाडी, सरार, गीदगढ़, मुड़ियाखेड़ा, शाहपुर, बेरखेड़ी चौराहा, खोहा, भरतीपुर, मादा, कायमपुर, जमुनिया, नीनोद, बेसर कालोनी, सुनारी, सलामतपुर, रातातलाई, टोरिया, मेढ़की, त्रिमूर्ति चौराहा, रतनपुर, तिजालपुर, कटसारी, खामखेड़ा, बागोद, बरौला, मुश्काबाद, सत्ती सहित अन्य गांव शामिल हैं।

क्या है ट्रूनेट मशीन--ट्रूनेट मशीन एक पोर्टेबल, बैटरी से चलने वाली और चिप-आधारित डायग्नोस्टिक मशीन है। जिसे गोवा की एक कंपनी द्वारा विकसित किया गया है। यह मुख्य रूप से लगभग एक घंटे में यक्ष्मा टीबी और उसके प्रकार एमटीबी का पता लगाने के लिए उपयोग की जाती है। यह तकनीक रीयल-टाइम पीसीआर पॉलीमर्स चैन रिएक्शन पर आधारित है। 

ट्रूनेट मशीन की मुख्य विशेषताएं---पोर्टेबल और तेज: यह मशीन छोटी है, बैटरी से चलती है, और टीबी के परिणामों को लगभग एक घंटे में दे सकती है। यह चिप-आधारित तकनीक का उपयोग करती है, जो नमूने में डीएनए को प्रवर्धित एम्प्लीफाई करके टीबी के कीटाणुओं की पहचान करती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से टीबी के निदान टीबी डायग्नोसिस के लिए किया जाता है, जिसमें ट्रुनेट एक्सपर्ट एमटीबी और ट्रुनेट एक्सपर्ट एमटीबी प्लस शामिल हैं। यह दूरदराज के क्षेत्रों में, जहां प्रयोगशाला की सुविधा कम है, वहां टीबी के परीक्षण के लिए एक प्रभावी उपकरण है।

टीबी के मुख्य लक्षण--सीबीएमओ डॉ रवि राठौर ने बताया कि टीबी (तपेदिक) के मुख्य लक्षणों में 2-3 सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी (कभी-कभी खून के साथ), शाम को बुखार आना, रात में पसीना आना, सीने में दर्द, भूख न लगना और तेजी से वजन घटना शामिल है। यह एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जिसके लक्षण दिखने पर तुरंत बलगम की जांच करानी चाहिए। और उन्होंने बताया कि टीबी फेफड़ों के अलावा अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। पेट की टीबी, पेट में दर्द, दस्त, या आंत में खराबी। हड्डी की टीबी: हड्डियों में दर्द या जोड़ों में सूजन। लिम्फ नोड (गांठ) टीबी: गर्दन या अन्य जगहों पर सूजन। यदि ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना और बलगम की जांच (TB Test) कराना जरूरी है। वहीं रिपोर्ट पॉज़िटिव आने पर मरीज का पहले 3 महीने ईलाज चलता है। फिर 6 महीने और ईलाज किया जाता है। 

इनका कहना है।

सलामतपुर पीएचसी को ट्रूनेट मशीन काफी प्रयासों के बाद मिल पाई है। साढ़े सात लाख रुपए कीमत की ट्रूनेट मशीन देने के लिए ल्युपिन फाउंडेशन आगे आया ओर मशीन उपलब्ध करा दी। अब दीवानगंज क्षेत्र जैसे दूर गांवों के मरीज़ों को जांच के लिए 25 किमी दूर सांची सिविल अस्पताल नही जाना पड़ेगा। सलामतपुर पीएचसी में ही आसानी के साथ इनकी जांच हो जाएगी।

डॉ रवि राठौर, सीबीएमओ सांची।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28