जर्जर भवनों के साए में जिंदगी: सलामतपुर में सिंचाई विभाग की कॉलोनी बनी 'डेथ ट्रैप'
-स्थानीय रहवासियों ने की शासन-प्रशासन से खंडहर भवनों को तत्काल ध्वस्त करने की मांग
-हादसे के बाद भी बेखबर है प्रशासन, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
रायसेन जिले के सांची जनपद क्षेत्र अंतर्गत आने वाले सलामतपुर कस्बे और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सरकारी अनदेखी की इंतहा देखने को मिल रही है। यहाँ स्थित जर्जर हो चुके सरकारी भवन किसी बड़ी त्रासदी को न्यौता दे रहे हैं। सबसे भयावह स्थिति सलामतपुर की सिंचाई विभाग कॉलोनी की है, जहाँ बने लगभग एक दर्जन भवन पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। ये जर्जर ढांचे अब इतने कमज़ोर हो चुके हैं कि कभी भी ताश के पत्तों की तरह ढह सकते हैं, जिससे यहाँ रहने वाले लोगों के लिए यह इलाका एक 'डेथ ट्रैप' बन गया है। कई दशक पुराने इन जर्जर भवनों की दीवारें दरक चुकी हैं और छत से प्लास्टर तथा सीमेंट के टुकड़े आए दिन गिरते रहते हैं। इन खंडहरों के आसपास से रोजाना दर्जनों राहगीर और मासूम बच्चे गुजरते हैं। बच्चे अक्सर इन खाली और जर्जर परिसरों में खेलते भी नज़र आते हैं, जिससे हर पल किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन खतरनाक भवनों को चिह्नित कर तत्काल डिस्मेंटल (ध्वस्त) किया जाए, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मासूम की मौत के बाद भी नहीं जागी प्रशासनिक नींद--
स्थानीय नागरिकों और ग्रामीणों में लोक निर्माण विभाग तथा जिला प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि प्रशासन हादसों से भी सबक लेने को तैयार नहीं है। गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व ही नजदीकी गांव अम्बाडी में एक जर्जर स्कूल भवन की दीवार अचानक ढह जाने से एक मासूम बच्ची की दबकर दर्दनाक मौत हो चुकी है। इस भयावह घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद नहीं टूटी। सांची जनपद क्षेत्र में कई स्थानों पर आज भी ऐसे दर्जनों जर्जर भवन खुलेआम मौत को दावत दे रहे हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी आँखें मूँदे बैठे हैं और शायद किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद ही फाइलों से धूल हटेगी।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी--
सिंचाई विभाग की इस जर्जर कॉलोनी और क्षेत्र के अन्य खंडहरों को लेकर अब आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही इन भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।
प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर उठते सवाल---सलामतपुर की सिंचाई विभाग कॉलोनी सिर्फ एक उदाहरण है; संपूर्ण सांची जनपद में ऐसी कई पुरानी और अनुपयोगी इमारतें हैं जो मरम्मत या ध्वस्तीकरण के अभाव में खड़ी हैं। हर मानसून और बदलते मौसम के साथ इन इमारतों का ढांचा और अधिक कमजोर होता जा रहा है। कागजी प्रक्रियाओं और विभागीय खींचतान के कारण इन भवनों को गिराने की अनुमति नहीं मिल पाती, जिसका खामियाजा आम जनता को अपनी सुरक्षा दांव पर लगाकर भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्रीय निवासियों ने रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा और संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि किसी नई त्रासदी से पहले एक विशेष टीम गठित कर इन भवनों का सर्वे कराया जाए और तुरंत 'असुरक्षित' घोषित करते हुए इन्हें बुलडोजर से ध्वस्त कराया जाए। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब जागता है या फिर किसी और मासूम की बलि का इंतजार करता है।
"प्रशासन की लापरवाही ले सकती है मासूमों की जान"--"सिंचाई विभाग कॉलोनी और आसपास के इलाकों में बने जर्जर भवन अत्यंत खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं। बच्चे अक्सर इन भवनों के आसपास खेलते रहते हैं। हमने कई बार शासन-प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित कराया, लेकिन अधिकारी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। अगर समय रहते इन भवनों को डिस्मेंटल नहीं किया गया, तो कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।"
मूलचंद यादव, पूर्व सरपंच, सलामतपुर।
"कागजों में अटकी है कार्रवाई, कागजी नहीं जमीनी काम करे विभाग"
"सांची जनपद के सलामतपुर स्थित सिंचाई विभाग कॉलोनी के जर्जर भवनों को गिराने के आदेश तुरंत जारी होने चाहिए। नजदीकी अम्बाडी गांव में एक मासूम की जान जाने के बाद भी अधिकारी सो रहे हैं। हमारी स्पष्ट मांग है कि सलामतपुर की सिंचाई कॉलोनी सहित सांची जनपद के सभी चिन्हित जर्जर भवनों को बिना किसी देरी के जमींदोज किया जाए। यदि प्रशासन ने कागजी खानापूर्ति छोड़कर जमीनी कार्रवाई नहीं की, तो हम उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।"
बबलू पठान, वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ता।






























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