-मिट्टी और वॉटरप्रूफ रंगों के दाम बढ़ने से लागत हुई महंगी 

​अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र) 

आगामी गणेश चतुर्थी पर्व को लेकर पूरे जिले में धार्मिक उत्साह का माहौल बनने लगा है। इस बार 14 सितंबर को गणेश उत्सव का त्यौहार अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। पर्व के निकट आते ही सलामतपुर और आसपास के अंबाडी क्षेत्र की मूर्तिकला कार्यशालाओं में रौनक बढ़ गई है। स्थानीय मूर्तिकार भगवान श्रीगणेश की मनमोहक प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जी-जान से जुटे हुए हैं। मूर्तियों में रंग-रोगन, श्रृंगार और बारीक नक्काशी का काम समय पर पूरा करने के लिए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। इस वर्ष गणेश उत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। यही वजह है कि प्रतिमाओं की मांग में पिछले वर्षों की तुलना में भारी उछाल आया है। स्थानीय मूर्तिकारों के अनुसार, आयोजन समितियों और व्यक्तिगत रूप से स्थापित करने वाले श्रद्धालुओं ने महीनों पहले से ही अपनी-अपनी पसंद की मूर्तियों के अग्रिम ऑर्डर (बुकिंग) दे दिए थे। अग्रिम बुकिंग अधिक होने के कारण मूर्तिकारों पर तय समय सीमा के भीतर सभी प्रतिमाएं तैयार करके देने का भारी दबाव है।

सामग्री की कीमतों में उछाल, लागत बढ़ने से कीमतें बढ़ीं--​प्रतिमा निर्माण से जुड़े मूर्तिकारों का कहना है कि इस साल प्रतिमा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। मूर्ति निर्माण के लिए आवश्यक विशेष मिट्टी, प्राकृतिक एवं चमकीले रंग, पुआल, बांस और सजावटी सामान पहले के मुकाबले काफी महंगे हो गए हैं। लागत बढ़ने के कारण मजबूरी में प्रतिमाओं के दामों में भी थोड़ा इजाफा करना पड़ा है। हालांकि, महंगाई के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। लोग बढ़-चढ़कर अपनी पसंदीदा प्रतिमाओं की बुकिंग करवा रहे हैं।

इनका कहना है।

इस वर्ष गणेश प्रतिमाओं की मांग बीते वर्षों के मुकाबले काफी अधिक है। श्रद्धालुओं ने कई हफ्ते पहले ही आकर मनपसंद आकार और डिजाइन की मूर्तियों के ऑर्डर दे दिए थे। समय पर सभी को मूर्तियां उपलब्ध कराना हमारी पहली प्राथमिकता है, इसलिए हम और हमारे परिवार के सदस्य दिन-रात कार्यशाला में काम कर रहे हैं। हालांकि, इस बार मिट्टी और वॉटरप्रूफ रंगों के दाम काफी बढ़ गए हैं, जिससे हमारी लागत बढ़ी है, लेकिन श्रद्धालुओं की खुशी और आस्था को देखते हुए हम बेहतरीन से बेहतरीन प्रतिमाएं बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

बबलू प्रजापति, स्थानीय मूर्तिकार।

​प्रतिमाओं को आकार देने के बाद उनके फिनिशिंग और रंग-रोगन में सबसे ज्यादा समय और मेहनत लगती है। मूर्तियों को आकर्षक और जीवंत रूप देने के लिए बहुत सावधानी से काम करना पड़ता है। इस बार बारिश और बढ़ती महंगाई ने हमारी थोड़ी चिंता जरूर बढ़ाई है, क्योंकि कच्चे माल के साथ-साथ परिवहन का खर्च भी बढ़ गया है। इसके बावजूद लोगों का उत्साह देखकर हमें बहुत खुशी मिलती है। हमारी कोशिश है कि 14 सितंबर से पहले सभी ऑर्डर समय पर तैयार करके श्रद्धालुओं को सौंप दिए जाएं।

संतोष प्रजापति, स्थानीय मूर्तिकार।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28