​-सामाजिक सरोकार की अनूठी मिसाल: बारिश के बाद उगे खरपतवारों को हटाया, पौधों का किया संरक्षण; समिति ने क्षेत्रवासियों से की जनभागीदारी की अपील।

​अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

आधुनिक दौर में जहाँ लोग अपनी व्यस्त दिनचर्या से अपनों के लिए भी समय नहीं निकाल पाते, वहीं सलामतपुर में सामाजिक जिम्मेदारी और जनसेवा की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आ रही है। सलामतपुर श्रमदान समिति ने निस्वार्थ सेवा और सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश करते हुए लगातार 38वें रविवार भी मुक्तिधाम परिसर में अपना स्वच्छता और सौंदर्यीकरण का अभियान जारी रखा। बिना किसी नागा के पिछले 38 हफ्तों से चल रहा यह अभियान अब क्षेत्र में एक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है।

बारिश के मौसम में स्वच्छता पर विशेष ध्यान--​रविवार सुबह हमेशा की तरह समिति के उत्साही सदस्य हाथों में झाड़ू, तसले और फावड़े लेकर मुक्तिधाम परिसर पहुंचे। वर्तमान में जारी बारिश के मौसम के कारण परिसर में काफी मात्रा में अनचाही घास और खरपतवार उग आए थे, जिससे आवागमन में असुविधा हो रही थी। समिति के सदस्यों ने कड़ी मेहनत कर इन खरपतवारों की सफाई की। पूरे परिसर में झाड़ू लगाई गई और वहां बिखरे कचरे, पॉलीथिन तथा शव वस्त्रों को एकत्र कर उनका उचित एवं वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया।

हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प--​समिति का यह अभियान सिर्फ साफ-सफाई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण को बचाने का संकल्प भी इसमें शामिल है। श्रमदान के दौरान सदस्यों ने पूर्व में परिसर के भीतर रोपे गए पौधों की देखरेख की। पौधों के आसपास से जंगली घास हटाकर उनमें खाद और पानी डाला गया, ताकि वे सुरक्षित रहकर बड़े वृक्ष बन सकें। समिति का उद्देश्य मुक्तिधाम को एक शांत, स्वच्छ और हरे-भरे स्थल के रूप में विकसित करना है।

​"यह अभियान किसी सम्मान, मंच या प्रशंसा की भूख के लिए नहीं चलाया जा रहा है। यह हमारी अपनी माटी के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी और एक पवित्र संकल्प का परिणाम है। हमारा एकमात्र लक्ष्य सलामतपुर के मुक्तिधाम को इतना स्वच्छ, सुंदर और सुविधायुक्त बनाना है कि यह आने वाले समय में हर किसी के लिए प्रेरणादायक स्थल बन सके।"समिति पदाधिकारी।

क्षेत्रवासियों से जनभागीदारी की भावुक अपील--​लगातार 38 सप्ताह से बिना रुके और बिना थके चल रहा यह अभियान आज पूरे क्षेत्र में सामाजिक भागीदारी की एक प्रेरक मिसाल बन चुका है। अभियान को और अधिक व्यापक बनाने के लिए समिति ने क्षेत्रवासियों से भावुक अपील की है। पदाधिकारियों का कहना है कि समाज के सहयोग के बिना कोई भी बड़ा बदलाव संभव नहीं है। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे भी अपने बहुमूल्य समय में से कुछ पल निकालकर इस जनहित अभियान से जुड़ें। जो लोग शारीरिक रूप से श्रमदान नहीं कर सकते, वे आर्थिक या संसाधन के रूप में सहयोग प्रदान कर इस पुनीत कार्य को और अधिक मजबूती दे सकते हैं।निस्संदेह, सलामतपुर श्रमदान समिति का यह निस्वार्थ प्रयास समाज को यह संदेश देता है कि यदि इरादे मजबूत हों और संकल्प में सच्चाई हो, तो छोटे-छोटे प्रयासों से भी व्यवस्था और परिवेश को पूरी तरह बदला जा सकता है।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28