भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुई श्रीमद्भागवत कथा: सुदामा चरित्र ने छू लिया हर दिल, हवन-पूजन के साथ हुआ भव्य समापन
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
कस्बे में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार को अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक माहौल में समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र सुदामा के चरित्र का मार्मिक वर्णन हुआ, जिसने हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। राष्ट्रीय कथा व्यास पंडित देवेन्द्र भार्गव महाराज ने सुदामा चरित्र के माध्यम से सच्ची मित्रता, निस्वार्थ भक्ति और संतोष की महिमा का बखान किया। कथा के सातवें और समापन दिवस पर मुख्य प्रसंग सुदामा चरित्र रहा। आचार्य जी ने बताया कि गरीबी में भी संतुष्ट सुदामा जब द्वारिका पहुंचे तो भगवान कृष्ण ने उन्हें राजसी स्वागत दिया। सुदामा द्वारा लाए एक मुट्ठी चिवड़े को प्रेमपूर्वक ग्रहण कर श्रीकृष्ण ने दिखाया कि सच्ची भक्ति और मित्रता में धन-दौलत का कोई स्थान नहीं होता। "संतोष ही परम धन है, जो व्यक्ति जीवन में संतुष्ट रहता है, वही सच्चा धनवान है," आचार्य ने कहा। इस प्रसंग को सुनकर पंडाल में मौजूद भक्त भाव-विभोर हो उठे, कई श्रद्धालुओं के नेत्र सजल हो गए।
समापन समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य हवन-यज्ञ संपन्न हुआ--श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में आहुतियां दीं और विश्व कल्याण, क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा व्यक्तिगत सुख-शांति की कामना की। हवन की अग्नि में सुगंधित समिधाओं और घी की आहुतियों से पूरा वातावरण दिव्य ऊर्जा से भर गया। हवन के पश्चात पूर्णाहुति दी गई और आरती के साथ कथा का औपचारिक समापन हुआ। मुख्य यजमान ममता शर्मा और जेपी शर्मा ने बताया कि कथा के दौरान प्रतिदिन भजन-कीर्तन, प्रवचन और श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन हुआ, जिसने लोगों को भक्ति रस में डुबोया। समापन पर आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। स्थानीय निवासी कैलाश गोस्वामी ने कहा, "सुदामा चरित्र सुनकर लगा कि सच्ची मित्रता और भगवान पर विश्वास कभी व्यर्थ नहीं जाता।" यह कथा न केवल धार्मिक आयोजन थी, बल्कि समाज में समानता, भक्ति और संतोष का संदेश देने वाली एक अनुपम पहल साबित हुई। आयोजक समिति के समस्त ग्रामवासियों ने सभी श्रद्धालुओं, दानदाताओं और कथा व्यास पंडित देवेन्द्र भार्गव का आभार व्यक्त किया।

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