सलामतपुर पुलिस का सराहनीय कार्य गुम हुए भाई बहन को परिजनों से मिलाया
-भाई बहन की खोज में भटक रही थी मां, पुलिस बनी मददगार
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
भले ही पुलिस विभाग के अधिकारियों या पुलिस जवानों की लोगों में छवि सही नही हो लेकिन कई ऐसे भी काबिल पुलिस अधिकारी व कर्मचारी विभाग में तैनात हैं जो ड्यूटी के साथ अपने सामाजिक नैतिक फर्ज भी निभा रहे हैं। और देश भक्ति जनसेवा के नारे को सार्थक रूप से पूरा करते हुए सराहनीय कार्य कर रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में घर का रास्ता भटके हुए दो सगे भाई बहन को सलामतपुर पुलिस ने उनके परिजनों से मिलवाया है। दोनों भाई बहन अपने घर का पता नही बता पा रहे थे। और बहुत रो रहे थे। उस समय पुलिस फरिश्ता बनकर आई और दोनों बच्चों को उनके माता व पिता से मिलवा दिया। पुलिस के इस सराहनीय कार्य की पूरे कस्बे में प्रशंसा हो रही है। और स्थानीय रहवासी पुलिस का आभार व्यक्त कर करे हैं।
ये है पूरा मामला----सलामतपुर थाने के रातातलाई टोरिया क्षेत्र से 1 सप्ताह पहले राजकुमार अहिरवार की पत्नी उसके माता पिता के घर अपने दोनों बच्चों प्रयांश 6 वर्ष और प्रयांशी 4 वर्ष को लेकर सुमेर गांव गई थी। वह शुक्रवार को सुमेर गांव से रातातलाई आने के लिए अपने दोनों बच्चों के साथ ट्रेन से सांची पहुंची। सांची में मां ने अपने दोनों बच्चों को शक्ति ट्रांसपोर्ट की बस में सलामतपुर के लिए बैठा दिया। बस में भीड़ होने की वजह से वह बस में नही बैठ पाई थी। दोनों भाई बहन सलामतपुर तो पहुंच गए लेकिन उन्हें घर का रास्ता पता नही था। तब शक्ति बस के ड्रायवर गज्जू अहिरवार ने बच्चों को रोता हुआ देखकर सलामतपुर थाने में उक्त मामले की जानकारी दी तो सलामतपुर थाना प्रभारी दिनेश सिंह रघुवंशी ने तत्काल थाने से प्रधान आरक्षक गणेश रघुवंशी और आरक्षक राहुल रघुवंशी को मामले की जानकारी देते हुए आसपास क्षेत्र में दोनों भाई बहन के घर की तलाश शुरू कर दी। दोनों भाई बहन का रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिस के काफी प्रयास के बाद दोनों बच्चों का घर मिल गया। पुलिस ने बच्चों को उनके परिजनों से मिलवा दिया। बच्चों के माता पिता ने पुलिस का आभार व्यक्त किया।
इनका कहना है।
मेरी पत्नी एक सप्ताह पहले दोनों बच्चों को लेकर सुमेर गांव मेरे माता पिता के घर गई थी। शुक्रवार को ट्रेन से सांची आई और बस में दोनों बच्चों को बैठा दिया। बस में कुछ लोग गांव के भी बैठे थे। उसने सोचा कि बच्चे घर पहुंच जाएंगे। बस में जगह नही होने के वह खुद बस में नही बैठ सही। सलामतपुर आकर बच्चे घर का रास्ता भटक गए। वह तो गनीमत रही कि पुलिस ने सही समय पर बच्चों को घर छोड़ दिया।
राजकुमार अहिरवार, टोरिया रातातलाई।
शुक्रवार को शक्ति बस के ड्रायवर गज्जू ने दोनों नाबालिग बच्चों को रोता हुआ देखकर थाने में मामले की जानकारी देकर छोड़ दिया। हमने गंभीरता के साथ आसपास क्षेत्र में बच्चों के घर का पता करके उनके परिजनों से मिलवा दिया।
दिनेश सिंह रघुवंशी, थाना प्रभारी सलामतपुर।

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