​भोपाल-विदिशा मुख्य मार्ग पर स्थित यह प्राचीन धाम हर राहगीर को करता है आकर्षित

-हाइवे पर थमती हैं गाड़ियाँ, आशीर्वाद लेकर आगे बढ़ते हैं वाहन चालक

अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

भोपाल-विदिशा मुख्य मार्ग पर स्थित सलामतपुर कस्बे का द्वारकाधीश मंदिर पिछले 100 सालों से श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की अपार आस्था का केंद्र बना हुआ है। एक सदी पुराना यह मंदिर न केवल आसपास के ग्रामीण अंचल के लिए परम पूजनीय स्थल है, बल्कि इस व्यस्त हाइवे से गुजरने वाले हर राहगीर के लिए विश्राम, शांति और भक्ति का एक अनिवार्य धाम बन चुका है।यहाँ से गुजरने वाला चाहे कोई भी वाहन हो निजी कार, बस, दोपहिया वाहन या मालवाहक ट्रक मंदिर के सामने पहुँचते ही उसकी रफ्तार धीमी हो जाती है। वाहन चालक और यात्री भक्तिभाव से मंदिर के सामने शीश नवाते हैं और भगवान का आशीर्वाद लेकर ही अपनी आगे की यात्रा पर बढ़ते हैं।

एक ही प्रांगण में दिव्य देव दर्शन--100 साल पुराने इस पावन मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का आध्यात्मिक वातावरण है। मंदिर प्रांगण में भगवान राधा-कृष्ण जी की मनमोहक प्रतिमाओं के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं का भी दिव्य वास है। राधा-कृष्ण मंदिर के मुख्य आराध्य, जिनके दर्शन मात्र से मन को असीम शांति मिलती है।​मंदिर में देवों के देव महादेव भगवान शिव का संपूर्ण पूरे परिवार (माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी) के साथ विराजमान हैं।और श्रद्धालुओं के कष्टों को हरने वाले श्री हनुमान जी की दिव्य प्रतिमा के साथ ही ​विद्या की देवी माँ सरस्वती: ज्ञान और सद्बुद्धि की दात्री माँ सरस्वती जी का पावन स्थान। और ​प्रथम पूज्य किसी भी शुभ कार्य और यात्रा की सफलता के लिए ऋद्धि-सिद्धि के दाता गणेश जी की उपस्थिति।एक ही स्थान पर इन सभी देवी-देवताओं के दर्शन होने से यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को सर्व-देवों की कृपा प्राप्त होती है।

सफर की सुरक्षा और आस्था का अनोखा संगम--भोपाल और विदिशा को जोड़ने वाले इस मार्ग पर दिन-रात गाड़ियों की आवाजाही बनी रहती है। चालकों का अटूट विश्वास है कि सफर की शुरुआत या रास्ते के दौरान 100 साल पुराने इस सिद्ध पीठ पर माथा टेक लेने से पूरी यात्रा निर्विघ्न और सुरक्षित संपन्न होती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार जब भी श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरते हैं, तो मंदिर को देखते ही अपने आप हाथ जुड़ जाते हैं। 100 वर्षों की इस पावन धरा में ऐसा आभामंडल है कि यहाँ माथा टेकने के बाद यात्रा का हर डर खत्म हो जाता है।

धार्मिक आयोजन और दिनचर्या--मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम को होने वाली आरती में केवल स्थानीय ग्रामीण ही नहीं, बल्कि हाइवे से गुजर रहे यात्री भी अपनी गाड़ियाँ रोककर शामिल होते हैं।​दैनिक पूजन व आरती: प्रातः और संध्या काल में वैदिक मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य आरती होती है। ​वहीं जन्माष्टमी, शिवरात्रि, हनुमान जयंती, बसंत पंचमी और गणेशोत्सव जैसे प्रमुख त्योहारों पर यहाँ भव्य धार्मिक आयोजन, कथाएँ और विशाल भंडारों का आयोजन किया जाता है।

हाइवे का 'आध्यात्मिक द्वार'--100 साल पुराने इस मंदिर का भव्य स्वरूप और शांत परिसर किसी भी तनावग्रस्त यात्री के मन को मोह लेता है। सलामतपुर पहुँचते ही मंदिर का शिखर दूर से ही नज़र आने लगता है, जो यात्रियों के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार करता है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि एक सदी से यह मंदिर इसी तरह राहगीरों की रक्षा कर रहा है और समय के साथ इसकी प्रसिद्धि और महिमा और अधिक बढ़ती जा रही है। द्वारकाधीश मंदिर समिति के सचिव रत्नेश अग्रवाल ने बताया कि ​सलामतपुर का द्वारकाधीश मंदिर केवल ईंट-पत्थरों से बना ढांचा नहीं, बल्कि 100 वर्षों के जन-विश्वास और आस्था का अटूट प्रतीक है। भोपाल-विदिशा हाइवे पर गाड़ियों की रफ्तार भले ही तेज हो, लेकिन द्वारकाधीश मंदिर में समस्त देव-परिवार के सम्मान में यहाँ आकर हर सिर श्रद्धा से झुक ही जाता है।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28