अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

रायसेन जिले के सांची विकासखंड अंतर्गत आने वाले भरतीपुर मादा क्षेत्र में अवैध ईंट भट्टों की भरमार ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां ऐसे-ऐसे नजारे सामने आ रहे हैं, जो कानून, नियम और बच्चों के भविष्य—तीनों पर करारा तमाचा हैं।

इन अवैध ईंट भट्टों पर स्कूल जाने की उम्र के छोटे-छोटे बच्चे ईंट ढोते और मजदूरी करते साफ दिखाई देते हैं। एक ओर सरकार बाल अधिकार, शिक्षा का अधिकार और “बेटा-बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर भर्तीपुर मादा में बाल मजदूरी खुलेआम फल-फूल रही है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन अवैध भट्टों की पूरी जानकारी स्थानीय पटवारी और तहसीलदार को होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। सवाल यह उठता है कि क्या यह अनदेखी मजबूरी है या मिलीभगत?

सूत्रों के अनुसार, इन ईंट भट्टों द्वारा अवैध रूप से मिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है। कई भट्टे नदी-नालों के किनारे नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। शासन के नियम, अनुमति और पर्यावरणीय मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध ईंट भट्टा संचालक राजनीतिक पहुंच का हवाला देकर कार्रवाई से बचे रहते हैं। यही कारण है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन की आंखों पर पट्टी बंधी हुई है। भरतीपुर मादा में कई ईंट भट्टे बिना किसी वैधानिक अनुमति के संचालित हो रहे हैं, लेकिन न तो श्रम विभाग सक्रिय है, न खनिज विभाग और न ही राजस्व प्रशासन। सवाल यह भी है कि क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा है?

अब बड़ा प्रश्न यह है कि क्या जिला प्रशासन जागेगा, या फिर मासूम बच्चों का भविष्य ईंटों के ढेर तले ही दबता रहेगा?

जनता प्रशासन से तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है, ताकि कानून का डर दिखे और अवैध कारोबार पर रोक लग सके।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28