केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने मध्यप्रदेश के सहकारी कार्यकर्ताओं के साथ भी किया संवाद
-केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने सलामतपुर पैक्स के प्रबंधक कुंवर सिंह दांगी से किया संवाद
-महिला प्रतिनिधियों ने साझा किये अपने अनुभव, प्रदेश की विभिन्न पैक्स के कार्यकर्ताओं को मिली सराहना
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारिता मंत्रालय के चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गुजरात के आणंद में अमूल एवं नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के विविध विकास कार्यों का शुभारंभ किया। इस अवसर पर देशभर से आये सहकारी समितियों के सदस्यों, विशेषकर महिला प्रतिनिधियों से संवाद कर सहकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को सराहा। इसमें रायसेन सहित मध्यप्रदेश की विभिन्न पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों) के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए, जिस पर उन्हें सराहना मिली।
सलामतपुर के कुंवर सिंह दांगी---नेपियर घास से बढ़ी आमदनी
केंद्रीय मंत्री को रायसेन जिले की सलामतपुर पैक्स के प्रबंधक कुंवर सिंह दांगी ने बताया कि उनकी समिति ने 50 एकड़ क्षेत्र में नेपियर घास की खेती प्रारंभ की है, जिससे किसानों को प्रति एकड़ 1 लाख तक का लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि संस्था का मशरूम वर्ल्ड कंपनी से टाईअप भी हुआ है। मंत्री ने पैक्स के बायलॉज में किए गए संशोधन का उल्लेख करते हुए उन्हें जिला सहकारी बैंक के निरीक्षक से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर नई गतिविधियों को जोड़ने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि उनकी समिति प्रधानमंत्री अन्न भंडारण योजना के अंतर्गत 2 एकड़ भूमि पर 3000 टन क्षमता का वेयरहाउस स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।
सहकारिता आंदोलन को गति देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में दो लाख नई पैक्स का गठन किया जाएगा, जो उत्पादन, अनाज विक्रय और ग्रामीण सेवा वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। साथ ही, एक राष्ट्रीय सहकारी विश्वविद्यालय तथा तीन नई डेयरी आधारित सहकारी समितियाँ स्थापित की जाएंगी, जिससे सहकारिता क्षेत्र को शिक्षित, संगठित और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाया जा सकेगा।
पैक्स को बहुआयामी संस्था में रूपांतरित करने का आह्वान
कार्यक्रम के समापन पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि पैक्स को केवल खाद या बीज वितरण तक सीमित न रखें। उन्हें खाली जमीन का उपयोग, मशीन किराये पर देना, जनऔषधि केंद्र का संचालन, और नई कृषि तकनीकों का प्रयोग करते हुए गांवों को आत्मनिर्भर बनाना चाहिए। उन्होंने सभी सहकारी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे मॉडल बायलॉज, कृषि एप्स, और नवीन योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर अपनी समिति को आर्थिक रूप से सक्षम एवं सेवा-प्रधान इकाई के रूप में विकसित करें।






























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