नाम बड़े और दर्शन छोटे: सांची सिविल अस्पताल में सुविधाओं का अकाल, मरीज परेशान
एक्स-रे फिल्म की जगह थमाया मोबाइल फोटो, विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से बिना इलाज लौटे आर्थिक रूप से कमजोर मरीज
अदनान खान सांची रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से उन्नत होकर सिविल अस्पताल का दर्जा पाने वाला सांची अस्पताल आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कागजों में तो यह सिविल अस्पताल बन चुका है, लेकिन धरातल पर मरीजों को मूलभूत सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए तरसना पड़ रहा है। अस्पताल का ताजा कारनामा स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलने के लिए काफी है।
मोबाइल फोटो से एक्स-रे जांच, डॉक्टर ने देखने से किया इनकार--अंबाड़ी निवासी और पेशे से पान की गुमटी चलाने वाले सुरेश जैन घुटने के दर्द से परेशान होकर सांची सिविल अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने उन्हें एक्स-रे कराने की सलाह दी। अस्पताल में एक्स-रे हुआ, लेकिन मूल एक्स-रे फिल्म देने के बजाय कर्मचारियों ने उनके मोबाइल में एक्स-रे की फोटो खींचकर थमा दी।हद तो तब हो गई जब अस्पताल में कोई हड्डी रोग विशेषज्ञ (ऑर्थोपेडिक) न होने के कारण उन्हें विदिशा के निजी डॉक्टर के पास भेजा गया। वहां निजी चिकित्सक ने मोबाइल वाली फोटो देखकर इलाज करने से साफ मना कर दिया और मूल फिल्म की मांग की। गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले सुरेश जैन आर्थिक तंगी के कारण दोबारा प्राइवेट एक्स-रे नहीं करा सके और उन्हें बिना इलाज के ही घर लौटना पड़ा।
शिकायत दर्ज कराने पर दबाव का आरोप--पीड़ित सुरेश जैन का आरोप है कि जब उन्होंने इस अव्यवस्था की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की, तो मामले को सुलझाने के बजाय उन पर शिकायत वापस लेने का अनुचित दबाव बनाया जाने लगा। एक तरफ सरकारी दावों में मुफ्त और आधुनिक इलाज की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर एक गरीब मरीज को बुनियादी जांच रिपोर्ट (फिल्म) न मिलने के कारण इलाज से वंचित होना पड़ा।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर खड़े हुए गंभीर सवाल--सांची सिविल अस्पताल पर आसपास के दर्जनों गांवों के सैकड़ों मरीज निर्भर हैं। यह घटना अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही और स्वास्थ्य विभाग के दावों की विफलता को दर्शाती है। सिविल अस्पताल बनने के बाद भी हड्डी रोग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती न होना।एक्स-रे की मूल प्रिंटेड फिल्म न देकर मोबाइल फोटो देना।सरकारी अस्पताल में असुविधाओं के कारण गरीबों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों की मांग--
क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग जल्द से जल्द सांची सिविल अस्पताल में पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति करे, जांच सुविधाओं की गुणवत्ता सुधारे और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करे ताकि गरीबों को भटकना न पड़े।






























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