सलामतपुर में गहराया बेरोजगारी का संकट, पलायन रोकने को नए उद्योगों की मांग
अदनान खान, सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
रायसेन जिले के सलामतपुर, दीवानगंज और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों बेरोजगारी की समस्या एक विकराल रूप ले चुकी है। क्षेत्र में रोजगार के साधन सीमित होने और पूर्व में संचालित फैक्ट्रियों के बंद हो जाने के कारण स्थानीय युवाओं के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि हर साल सैकड़ों की संख्या में शिक्षित और कुशल-अकुशल बेरोजगार युवक काम की तलाश में बड़े शहरों जैसे भोपाल, इंदौर, गुजरात और महाराष्ट्र की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने अब शासन-प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान और क्षेत्र में नए उद्योग शुरू करने की पुरजोर मांग की है।
औद्योगिक क्षेत्र का ढहता ढांचा: कुछ ही वर्षों में बंद हुईं कई फैक्ट्रियां--सलामतपुर और दीवानगंज क्षेत्र को कभी इस इलाके के औद्योगिक विकास की धुरी माना जाता था। यहाँ लगी फैक्ट्रियों से न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता था, बल्कि आसपास के बाजारों में भी रौनक रहती थी। लेकिन बीते कुछ वर्षों में प्रशासन की बेरुखी, बिजली-पानी की किल्लत और आर्थिक मंदी के चलते यहाँ की कई प्रमुख फैक्ट्रियां और मिलें एक-एक करके बंद हो गईं। फैक्ट्रियों के बंद होने से सैकड़ों मजदूर रातों-रात बेरोजगार हो गए। जो क्षेत्र कभी मशीनों की गड़गड़ाहट और मजदूरों की चहल-पहल से गूंजता था, आज वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों के कारण न सिर्फ युवाओं का भविष्य अंधकारमय हुआ है, बल्कि स्थानीय व्यापार भी पूरी तरह चौपट हो गया है।
अपनों को छोड़ बड़े शहरों की ओर रुख करने को मजबूर युवा--क्षेत्र में रोजगार का कोई अन्य साधन न होने के कारण युवाओं के पास पलायन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। खेती-किसानी पर बढ़ती निर्भरता और लगातार होते नुकसान ने संकट को और बढ़ा दिया है। स्थानीय बेरोजगार युवकों का कहना है कि वे अपने घर-परिवार और बुजुर्ग माता-पिता को छोड़कर दूसरे राज्यों में नहीं जाना चाहते, लेकिन मजबूरी में उन्हें बेहद कम वेतन पर अमानवीय परिस्थितियों में बड़े शहरों में काम करना पड़ रहा है।
शासन-प्रशासन से समाधान की गुहार: नए उद्योगों की स्थापना की मांग--इस गंभीर स्थिति को लेकर अब क्षेत्र के युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों में भारी आक्रोश है। स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन और उद्योग विभाग से मांग की है कि सलामतपुर-दीवानगंज क्षेत्र के औद्योगिक पुनरुद्धार के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।युवाओं और स्थानीय संगठनों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं कि बंद फैक्ट्रियों को पुनः चालू किया जाए। जो फैक्ट्रियां किन्हीं कारणों से बंद पड़ी हैं, उन्हें सरकारी मदद या नए निवेशकों के माध्यम से दोबारा शुरू कराया जाए।
नए उद्योगों को प्रोत्साहन: क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति (भोपाल से नजदीकी) को देखते हुए यहाँ नए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की स्थापना के लिए उद्योगपतियों को आकर्षित किया जाए।
स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता: क्षेत्र में लगने वाले किसी भी नए उद्योग में कम से कम 80 प्रतिशत रोजगार स्थानीय युवाओं को देने का नियम कड़ाई से लागू किया जाए।
सामाजिक और आर्थिक संकट का रूप ले रहा पलायन--सलामतपुर और आसपास के क्षेत्रों से युवाओं का यह पलायन न केवल एक आर्थिक समस्या है, बल्कि एक सामाजिक संकट भी बनता जा रहा है। गाँव के गाँव युवाओं से खाली हो रहे हैं। यदि समय रहते शासन-प्रशासन ने सुध नहीं ली और नए उद्योगों की स्थापना की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह औद्योगिक क्षेत्र पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन स्थानीय युवाओं की इस जायज मांग को कितनी गंभीरता से लेता है।
इनका कहना है।
"सलामतपुर दीवानगंज क्षेत्र में कई फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं, लेकिन इनको दोबारा प्रारंभ किए जाने की दिशा में कोई काम नहीं किया जा रहा है। हजारों लोगों के बेरोजगार हो जाने के कारण उन्हें इधर-उधर रोजगार की तलाश में भटकना पड़ रहा है। संगठन द्वारा ज्ञापन देकर सरकार से फैक्ट्रियों को पुनः शुरू करने एवं नए उद्योग लगाए जाने की मांग की गई है। अगर शीघ्र ही हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।"
सुरेन्द्र मेहरा, अध्यक्ष, बेरोजगार मजदूर संगठन, सलामतपुर।
"हमने पढ़ाई-लिखाई इसलिए की थी कि अपने क्षेत्र में रहकर ही कुछ काम करेंगे और परिवार का सहारा बनेंगे। लेकिन यहाँ कोई काम ही नहीं है। सरकारें रोजगार के बड़े-बड़े दावे करती हैं, पर धरातल पर सलामतपुर का युवा आज भी भटकने को मजबूर है।"
कैलाश गोस्वामी, स्थानीय बेरोजगार युवा।






























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