संयम और आत्म शुद्धि का पर्युषण पर्व हर्षोल्लास से सम्पन्न
-पर्युषण पर्व पर जैन समाज ने मुख्यमार्गों से निकाला जुलूस
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
शनिवार को जैन समाज ने पर्युषण पर्व पर धूमधाम के साथ भोपाल विदिशा मुख्यमार्ग पर जुलूस कार्यक्रम आयोजित किया। यह जुलूस श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से शुरू होकर सिंचाई विभाग कालोनी तक निकाला गया और इसका समापन मंदिर पर ही हुआ। यह पर्युषण पर्व जैन धर्म का सबसे बड़ा और पवित्र उत्सव माना जाता है। यह पर्व साल में एक बार आता है और यह भगवान महावीर के मूल सिद्धांत आत्मा की शुद्धि, अहिंसा, और संयम का संदेश देता है। ‘पर्युषण’ शब्द का अर्थ है- अपने अंदर बस जाना, यानी आत्मचिंतन करना है। आमतौर पर पर्युषण पर्व श्वेतांबर संप्रदाय में 8 दिन का पर्व होता है और दिगंबर संप्रदाय के लिए यह पर्व 10 दिन तक चलता है। लेकिन कई जगह इसे पूरे 10 दिन मनाने की परंपरा भी है। समाज के अध्यक्ष नीरज जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व एक ऐसा पर्व है जो उत्तम छमा से प्रारंभ होता है। ओर छमा वाणी पर ही उसका समापन होता है। वहीं जुलूस कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष नीरज जैन बंटी भैया, प्रमोद जैन, प्रकाश जैन, चक्रेश जैन, अनुज जैन, गौरव जैन, शीतल जैन, पर्व जैन, सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां भी मौजूद रहीं।
संयम और आत्म शुद्धि का पर्व है पर्युषण पर्व--पर्यूषण पर्व, जैन समाज का एक महत्वपूर्ण पर्व है। जैन धर्मावलंबी भाद्रपद मास में पर्यूषण पर्व मनाते हैं। ये पर्यूषण पर्व 10 दिन चलते हैं। 12 वें दिन जैन धर्म के लोगों का महत्वपूर्ण त्यौहार संवत्सरी पर्व मनाया जाता है। इस दिन यथा शक्ति उपवास रखा जाता है। पर्यूषण पर्व की समाप्ति पर संवत्सरी (क्षमायाचना) पर्व मनाया जाता है। इन 10 दिनों में श्रावक अपनी शक्ति अनुसार व्रत-उपवास आदि करते है। ज्यादा से ज्यादा समय भगवन की पूजा-अर्चना में व्यतीत किया जाता है। इन 10 दिनों में सुबह एवं शाम को प्रतिक्रमण करते हुए पूरे साल मे किये गए पाप और कटू वचन से किसी के दिल को जानते और अनजाने ठेस पहुंची हो तो क्षमा याचना करते है। एक दूसरे को क्षमा करते है और एक दूसरे से क्षमा माँगते हैं। और हाथ जोड़कर गले मिलकर मिच्छामी दूक्कडम करते है।
