कीचड़ में सने रास्ते से निकली अंतिम यात्रा, ग्रामीणों ने उठाई श्मशान घाट तक पक्के मार्ग की मांग
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चिरहोली के गांव फतेहपुर मरमटा में बुनियादी सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों के लिए मुसीबत बना हुआ है। गांव के श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता वर्षों से बदहाल स्थिति में पड़ा है। स्थिति यह है कि बारिश के दिनों में यह कच्चा मार्ग पूरी तरह से दलदल और कीचड़ में तब्दील हो जाता है। ऐसे दुखद समय में भी परिजनों और ग्रामीणों को शव यात्रा निकालने के लिए भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है।
हाल ही में गांव में हुई एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद यह दर्दनाक तस्वीर एक बार फिर सामने आई। अंतिम संस्कार के लिए जा रही शवयात्रा को घुटनों तक भरे कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते से गुजरना पड़ा। चार कंधों पर अर्थी संभाले ग्रामीण गिरते-संभलते हुए किसी तरह श्मशान घाट तक पहुंचे।
जीवन के अंतिम सफर में भी इस तरह की दुर्गति होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश---ग्रामीणों का आरोप है कि श्मशान घाट मार्ग के निर्माण को लेकर ग्राम पंचायत से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक को कई बार अवगत कराया जा चुका है। हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता। हर मानसून में यह रास्ता ग्रामीणों के लिए एक भयानक परीक्षा जैसा बन जाता है। इस बार फिर बारिश के शुरू होते ही समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और ग्राम पंचायत से मांग की है कि श्मशान घाट तक अविलंब पक्के मार्ग का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने परिजन के अंतिम संस्कार के समय ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े।
इनका कहना है।
हमारे गांव फतेहपुर मरमटा में श्मशान घाट का रास्ता सालों से कच्चा और जर्जर है। बारिश होते ही पूरा रास्ता कीचड़ से भर जाता है। हाल ही में जब गांव में गमी हुई, तो शव को श्मशान तक ले जाना बेहद खतरनाक और चुनौतीपूर्ण हो गया था। फिसलन इतनी ज्यादा होती है कि कंधा देने वाले लोगों के गिरने का डर बना रहता है। दुखी परिवार और सांत्वना देने आए लोगों को इस कीचड़ से गुजरना पड़ता है। हमने कई बार जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से पक्की सड़क बनवाने का निवेदन किया, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
भगवान सिंह, स्थानीय रहवासी।
इंसान के अंतिम समय में कम से कम एक सम्मानजनक रास्ता तो मिलना ही चाहिए। श्मशान मार्ग की बदहाली के कारण बारिश के दिनों में अंतिम संस्कार करना बेहद पीड़ादायक प्रक्रिया बन जाती है। पैदल चलना भी मुश्किल है, ऐसे में अर्थी लेकर जाना कितना कठिन होता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। हम ग्राम पंचायत और प्रशासन से मांग करते हैं कि इस समस्या को गंभीरता से लिया जाए और प्राथमिकता के आधार पर श्मशान घाट तक सुगम व पक्के मार्ग का निर्माण कराया जाए।
रोहित, स्थानीय रहवासी।






























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