​अदनान खान ​सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

मध्यप्रदेश सरकार जहां एक तरफ 'हर घर जल' का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। ताजा मामला रायसेन जिले के सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम गीदगढ़ का है। यहाँ करीब 58 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्मित नल-जल योजना शुरू होने से पहले ही भ्रष्टाचार और अफसरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। आलम यह है कि करोड़ों की उम्मीदों के साथ शुरू हुई यह योजना धरातल पर पूरी तरह फेल नजर आ रही है और ग्रामीण पिछले तीन महीनों से पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।

शोपीस बनी पानी की टंकी, भ्रष्टाचार की गवाही दे रही पाइपलाइन--ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ठेकेदार और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पीएचई के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के कारण निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं बरती गईं। गांव में बनाई गई पानी की ऊंची टंकी आज महज एक 'सफेद हाथी' (शोपीस) साबित हो रही है। योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइन इतनी घटिया गुणवत्ता की है कि टेस्टिंग के शुरुआती दौर में ही जगह-जगह से लीकेज सामने आ गया। ठेकेदार ने कागजों पर काम पूरा दिखाने की जल्दबाजी में तकनीकी मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया।

टेस्टिंग के दौरान ही फुंका ट्रांसफार्मर, 3 महीने से ठप पड़ी योजना--योजना की नाकामी का सफर यहीं नहीं रुका। ग्रामीणों के अनुसार, जब योजना की पहली टेस्टिंग की जा रही थी, तभी घटिया विद्युत फिटिंग या ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफार्मर (डीपी) जल गया। इस हादसे के बाद से पूरी योजना ठप पड़ी हुई है। पिछले 90 दिनों से न तो जला हुआ ट्रांसफार्मर बदला गया और न ही पाइपलाइन के लीकेज को ठीक करने की कोई जहमत उठाई गई। नतीजतन, ग्रामीणों को भीषण गर्मी और रोजमर्रा के दिनों में दूर-दराज के खेतों और कुओं से पानी ढोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

सरपंच का आरोप: बिना हैंडओवर गायब हुआ ठेकेदार, विभाग भी मौन--ग्राम पंचायत गीदगढ़ की सरपंच लीलाकृष्ण अहिरवार ने इस पूरे मामले में ठेकेदार और विभाग को कटघरे में खड़ा किया है। सरपंच का आरोप है:

​"ठेकेदार ने बेहद घटिया और स्तरहीन निर्माण कार्य कराया है। जब काम में कमियां दिखीं तो हमने कई बार ठेकेदार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसने बात करना भी मुनासिब नहीं समझा। सबसे बड़ी बात यह है कि ठेकेदार ने अभी तक इस नल-जल योजना को पंचायत को विधिवत रूप से हैंडओवर (सौंपा) भी नहीं किया है।"

​सरपंच ने आगे बताया कि इस गंभीर लापरवाही की लिखित शिकायत संबंधित पीएचई  विभाग के आला अधिकारियों को भी दी गई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं और मामले को गंभीरता से लेने को तैयार नहीं हैं।

बच्चों की पढ़ाई छूटी, महिलाओं का फूटा गुस्सा: 'मांग पूरी नहीं हुई तो तोड़ देंगे नल और टंकी'--पानी के इस गंभीर संकट का सबसे बुरा असर गांव के बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है। पानी लाने की जद्दोजहद में बच्चों की स्कूली शिक्षा तक प्रभावित हो रही है। गांव की महिलाओं ने अब प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 4 दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सांची जनपद कार्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन करेंगे।

प्रशासनिक मुस्तैदी पर बड़ा सवाल--गीदगढ़ गांव के हालात यह साफ बयां करते हैं कि सरकारी बजट का किस तरह दुरुपयोग किया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद रायसेन जिला प्रशासन और पीएचई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जागते हैं या गीदगढ़ के ग्रामीणों को अपनी बुनियादी जरूरत 'पानी' के लिए सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

इनका कहना है।

"पिछले 3 महीने से बिजली की डीपी जली हुई पड़ी है। इसकी वजह से पानी की सप्लाई पूरी तरह बाधित है। सरपंच साहब ने भी ठेकेदार को कई बार बोला, लेकिन ठेकेदार काम कराने के बजाय सिर्फ खोखले आश्वासन दे रहा है।"

अर्जुन सिंह धाकड़, नल ऑपरेटर।

"सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले पानी की चिंता सताने लगती है। कई महीनों से नल में पानी नहीं आया। हमें अपने छोटे-छोटे बच्चों को साथ लेकर दूर खेतों से पानी ढोना पड़ रहा है। इस चक्कर में बच्चे समय पर स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं।"

भगवती बाई, स्थानीय महिला।

"सरकार ने नल इसलिए लगवाए थे ताकि हमारी परेशानी कम हो, लेकिन यहाँ तो मुसीबत और बढ़ गई है। लिखित शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। अगर 4 दिन में पानी चालू नहीं हुआ, तो हम महिलाएं गुस्से में सारे नल और पानी की टंकी तोड़ देंगे।"

सीमा बाई, स्थानीय महिला।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28