-भोपाल विदिशा स्टेट हाइवे 18 स्तिथ सलामतपुर रेलवे फाटक पर बनाया गया है ओवरब्रिज

​अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

भोपाल-विदिशा स्टेट हाईवे 18 पर बना 1 किमी लंबा ब्रिज भ्रष्टाचार और लापरवाही की जीती-जागती मिसाल बन चुका है। रोजाना 15 हजार से अधिक वाहनों की आवाजाही वाले इस पुल की रेलिंग आड़ी हो चुकी है, पिलर धसक रहे हैं और लोहे के सरिये बाहर आ गए हैं। दिल्ली-मुंबई मेन रेलवे ट्रैक के ऊपर बने इस पुल पर अब तक एक दर्जन से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हैं।

भ्रष्टाचार की बुनियाद: 'ब्लैक कॉटन स्वाइल' की चेतावनी को ठेंगा, रसूख के आगे झुका सिस्टम--सलामतपुर रेलवे फाटक पर जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए वर्ष 2011 में मध्य प्रदेश ब्रिज कारपोरेशन द्वारा 6 करोड़ रुपए की लागत से इस ओवरब्रिज का निर्माण शुरू कराया गया था। साल 2013 में यह पुल बनकर तैयार तो हो गया, लेकिन अपने जन्म के साथ ही यह गंभीर विवादों में घिर गया।

​पुल के निर्माण के समय ही तकनीकी खामियों को लेकर आवाज उठी थी। ब्रिज कारपोरेशन के तत्कालीन एसडीओ (जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं) ने लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी कि जिस क्षेत्र में पुल बनाया जा रहा है, वह 'ब्लैक कॉटन स्वाइल' (काली कपासी मिट्टी) का इलाका है। इस तरह की मिट्टी में पिलर की गहराई बहुत अधिक रखनी होती है, अन्यथा पुल के धसकने का खतरा हमेशा बना रहता है। तत्कालीन एसडीओ ने साफ कहा था कि पुल के पिलर की गहराई कम रखी जा रही है, जो भविष्य में घातक साबित होगी।

अफसर की ईमानदारी पर भारी पड़ा ठेकेदार का रसूख--सूत्रों के मुताबिक, पुल का निर्माण कर रहा ठेकेदार तत्कालीन केंद्रीय मंत्री का बेहद खास और ऊंचे रसूख वाला व्यक्ति था। राजनीतिक दबाव और रसूख के चलते ईमानदार एसडीओ की तकनीकी चेतावनियों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। व्यवस्था से दुखी होकर और अपनी बात न सुने जाने से आहत होकर तत्कालीन एसडीओ ने अपना ट्रांसफर वहां से करवा लिया। नतीजा आज सबके सामने है। पुल धीरे-धीरे पाताल में धंस रहा है।

खूनी मोड़ ले चुका है हाईवे: 600 मीटर के दायरे में 10 इंच गहरे गड्ढे, एक दर्जन मौतें--

यह ओवरब्रिज अब राहगीरों के लिए 'सड़क' नहीं बल्कि 'यमलोक का रास्ता' बन चुका है। ब्रिज के दोनों तरफ लगभग 600 मीटर के दायरे में 8 से 10 इंच गहरे खतरनाक गड्ढे हो चुके हैं। इन गड्ढों में दोपहिया वाहनों के साथ-साथ चार पहिया वाहनों के टायर भी फंस जाते हैं। अचानक टायर फंसने से वाहन अनियंत्रित होकर पलट जाते हैं।विगत 7 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस पुल पर हुई सड़क दुर्घटनाओं के कारण एक दर्जन से अधिक लोग अकाल मौत का शिकार हो चुके हैं। पुल की हालत इतनी बदतर है कि दोनों तरफ की रेलिंग टूटकर आड़ी (टेढ़ी) हो चुकी है और उसमें लगे लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं। फुटपाथ कई जगहों से पूरी तरह टूटकर मलबे में तब्दील हो चुका है।

​संवेदनहीनता का सबसे बड़ा सबूत है।

दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर मंडरा रहा है महाविनाश का खतरा--यह ओवरब्रिज कोई सामान्य पुल नहीं है, बल्कि यह दिल्ली-मुंबई मुख्य रेलवे ट्रैक के ठीक ऊपर से गुजरता है। इस ट्रैक पर देश की सबसे महत्वपूर्ण और वीआईपी ट्रेनें दौड़ती हैं। हर चार मिनट में इस ट्रैक से एक ट्रेन गुजरती है।पुल की रेलिंग धसक कर पूरी तरह झुक चुकी है। ऐसे में अंदेशा यह है कि यदि कोई तेज रफ्तार भारी वाहन या बस इन गड्ढों के कारण अनियंत्रित होती है, तो वह सीधे रेलिंग तोड़ते हुए नीचे से गुजर रही किसी हाई-स्पीड ट्रेन पर गिर सकती है। यदि ऐसा हुआ, तो यह देश की सबसे बड़ी रेल दुर्घटनाओं में से एक होगी। खतरे की घंटी बज रही है, लेकिन मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन (MPRDC) के अधिकारी पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाए हुए हैं।

वीआईपी रूट फिर भी अनदेखी:शिवराज सिंह चौहान से लेकर कई दिग्गज इसी मार्ग से गुजरते हैं--हैरानी की बात यह है कि इस जर्जर और जानलेवा हो चुके पुल से हर हफ्ते प्रदेश और देश के बड़े-बड़े वीआईपी गुजरते हैं। देश के केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सप्ताह में कम से कम एक बार इसी रेलवे ओवरब्रिज से गुजरते हुए अपने गृह क्षेत्र विदिशा जाते हैं।प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का भी इस मार्ग से लगातार आना-जाना बना रहता है।यह पूरा इलाका और रेलवे ओवरब्रिज प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।इतने दिग्गज नेताओं के नियमित आवागमन और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद, एमपीआरडीसी के तकनीकी अधिकारियों की आंखें नहीं खुल रही हैं। पिछले 12 सालों में विभाग ने पैचवर्क और मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए फूंक दिए, लेकिन भ्रष्टाचार की नींव पर बने इस पुल की सेहत में सुधार नहीं हुआ।

खोहा के सरपंच कालूराम मीणा सहित क्षेत्र के जागरूक नागरिक यशवंत राजपूत (गाडरखेड़ी), कैलाश गोस्वामी, अशोक त्रिपाठी, मयंक साहू, दीपक अहिरवार, हसन मंसूरी और अमित विश्वकर्मा का भी यही कहना है कि यदि समय रहते इस पुल को पूरी तरह से बंद कर इसका पुनर्निर्माण या पुख्ता सुदृढ़ीकरण नहीं किया गया, तो सलामतपुर में एक बड़ी मानवीय त्रासदी को टाला नहीं जा सकेगा। प्रशासन को इस 'सफेद हाथी' बन चुके खूनी पुल पर तुरंत संज्ञान लेना होगा।​

जनता का दर्द और आक्रोश: "जान हथेली पर रखकर निकलने को मजबूर"--​पुल की जर्जर हालत को लेकर स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और राहगीरों में भारी आक्रोश है।पुल का निर्माण बेहद घटिया, कभी भी गिर सकता है

"सलामतपुर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण बेहद घटिया स्तर का किया गया था। यही वजह है कि महज कुछ ही वर्षों में पुल में जगह-जगह बड़े गैप आ गए हैं, सड़कें धंस गई हैं और रेलिंग आड़ी हो गई है। आए दिन निर्दोष लोग यहां घायल हो रहे हैं। सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है।"

रघुवीर सिंह मीणा, सरपंच ग्राम पंचायत रातातलाई।

यातायात का भारी दबाव, बाइक सवारों के लिए काल--

"यह ब्रिज भोपाल-विदिशा स्टेट हाईवे 18 पर स्थित है, जहां 24 घंटे भारी ट्रैफिक रहता है। पुल बनने के कुछ समय बाद ही इसमें दरारें आ गई थीं। अब तो गड्ढों में बाइक के टायर फंसने से रोजाना लोग गिरकर लहूलुहान हो रहे हैं। जिम्मेदार मौन हैं।"

वहीद खान, वरिष्ठ पत्रकार, भोपाल।

दोषी अफसरों पर हो सख्त कार्रवाई

"जब भी मैं सलामतपुर से भोपाल के लिए मोटरसाइकिल से निकलता हूँ, तो इस पुल पर जान हलक में आ जाती है। साइड से फुटपाथ गायब है, रेलिंग नीचे झुक चुकी है। डर लगता है कि कहीं चलते-चलते पूरा पुल ही नीचे न गिर जाए। इस घटिया निर्माण के जिम्मेदार अफसरों को जेल भेजा जाना चाहिए।"

सुरेन्द्र मेहरा, अध्यक्ष - बेरोजगार मजदूर संगठन, सलामतपुर।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28