​-तीन गांवों का मुख्य मार्ग बना आफत; रेलवे और प्रशासन से स्थायी समाधान की गुहार

​अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

जिले के सांची विकासखंड अंतर्गत आने वाले गीदगढ़ गांव के मार्ग पर स्थित रेलवे अंडरपास पुलिया में बारिश होते ही जलभराव की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। हर बार की तरह इस मानसून में भी अंडरपास में घुटनों तक पानी भर गया है, जिससे क्षेत्र के कई गांवों के लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर इस गंदे पानी के बीच से निकलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

दो-तीन गांवों का इकलौता मुख्य रास्ता--गीदगढ़ अंडरपास सिर्फ एक गांव के लिए नहीं, बल्कि आसपास के 2 से 3 गांवों के लिए आवागमन का मुख्य जरिया है। वैकल्पिक मार्ग न होने के कारण ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और राहगीरों के पास इसी रास्ते का इस्तेमाल करने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं है।बारिश के दिनों में अंडरपास किसी मिनी तालाब में तब्दील हो जाता है। ऐसे में बाइक सवारों, पैदल चलने वालों और चौपहिया वाहन चालकों को पानी के बीच से गुजरना पड़ता है। कई बार दोपहिया वाहन पानी में बंद हो जाते हैं या फिसलन के कारण हादसे का शिकार हो जाते हैं।

हर साल की आफत, लेकिन समाधान शून्य--स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। हर साल बारिश के मौसम में उन्हें इस भयावह स्थिति का सामना करना पड़ता है। पानी से होकर गुजरने के कारण न केवल लोगों के कपड़े खराब होते हैं, बल्कि बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना रहता है। साल-दर-साल इस परेशानी को झेल रहे ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की है।

रेलवे और प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग--क्षेत्रीय ग्रामीणों ने एक बार फिर रेलवे प्रशासन और स्थानीय जिला प्रशासन का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया है। निवासियों की मांग है कि: अंडरपास में जल निकासी  की समुचित व्यवस्था की जाए।बारिश के पानी को तुरंत बाहर निकालने के लिए ऑटोमैटिक वाटर पंप लगाए जाएं।यदि संभव हो तो ग्रामीणों के लिए एक सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जाए।ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।

इनका कहना है।

बारिश आते ही हमारे गांव की कनेक्टिविटी एक तरह से खत्म हो जाती है। अंडरपास में घुटनों तक पानी भर जाता है और हमारे पास बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है। बाइक सवार रोज गिर रहे हैं, बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। प्रशासन और रेलवे को कई बार बताया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

रोहित यादव, स्थानीय रहवासी।

हम हर साल इस जलभराव की समस्या को सहने को मजबूर हैं। जरा सी बारिश में ही पुलिया के नीचे तालाब जैसा नजारा बन जाता है। हमारी मांग है कि रेलवे और संबंधित विभाग जल्द से जल्द यहां पंप लगाकर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करें, ताकि लोगों को इस रोजाना की मुसीबत से राहत मिल सके।

मिजबान सिंह, स्थानीय रहवासी।

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28