​-27 फरवरी को हुए दर्दनाक हादसे के बाद भी लोक निर्माण विभाग और जिम्मेदार अधिकारी बेपरवाह।

​-प्रतिदिन गुजरते हैं 10,000 वाहन; सुरक्षा रेलिंग को 3 से 4 फीट ऊँचा करने की स्थानीय निवासियों ने की पुरज़ोर माँग।

अदनान खान, सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

​रायसेन जिले के सलामतपुर में भोपाल–विदिशा स्टेट हाईवे-18 पर स्थित नहर की पुलिया इन दिनों राहगीरों और वाहन चालकों के लिए 'मौत का कुआँ' बन चुकी है। इस व्यस्त मार्ग पर सुरक्षा मानकों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। पुलिया पर मजबूत सुरक्षा रेलिंग न होने के कारण यहाँ आए दिन वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। प्रतिदिन हजारों लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं, लेकिन लोक निर्माण विभाग और संबंधित प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है।विशेषज्ञों का साफ मानना है कि जब तक इस पुलिया पर कम से कम 3 से 4 फीट ऊँची सुरक्षा रेलिंग और चेतावनी संकेतक  नहीं लगाए जाते, तब तक यहाँ हादसों का सिलसिला थमना असंभव है।

दर्दनाक हादसे में माँ-बेटी की जा चुकी है जान--इस पुलिया की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज़ 8 महीने पहले यहाँ संघमित्रा होटल के पास नहर वाले मोड़ पर एक भयानक दुर्घटना घटी थी।27 फरवरी को भोपाल से आ रही एक अनियंत्रित कार सीधे नहर में जा गिरी।कार में सवार एक ही परिवार के 8 लोगों में से माँ (फूलबती बाल्मीकि, उम्र 40 वर्ष) और बेटी (जमना बाल्मीकि) की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि चालक पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गया था।

ट्रक गिरने से रायसेन की पानी सप्लाई हफ्ते भर रही ठप--हादसे केवल यात्री वाहनों तक सीमित नहीं हैं। पूर्व में मैहर से सीमेंट भरकर भोपाल जा रहा एक भारी ट्रक (एमएच 18 बीजी 9797) रात के अंधेरे में पुलिया की पैरापेट वॉल तोड़ते हुए नहर में जा गिरा था। इस हादसे के कारण हलाली डैम से रायसेन जाने वाली मुख्य पेयजल पाइपलाइन टूट गई थी, जिससे रायसेन शहर में पूरे एक हफ्ते तक जल प्रदाय व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त रही।​विभाग ने इसके बाद रिपेयरिंग के नाम पर खानापूर्ति करते हुए महज एक-एक फीट की नाममात्र दीवार खड़ी कर दी, जो रात के समय वाहन चालकों को दिखाई भी नहीं देती।

रोजाना 10,000 वाहनों का दबाव और वीवीआइपी रूट--स्टेट हाईवे-18 कोई साधारण मार्ग नहीं है। यहाँ से प्रतिदिन मध्य प्रदेश, यूपी, दिल्ली, मुंबई और गुजरात जाने वाले लगभग 10,000 छोटे-बड़े वाहन और ओवरलोडेड ट्राले गुजरते हैं।इसी मार्ग से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल जैसे वीवीआइपी का नियमित आवागमन होता है।​इसके बावजूद प्रशासनिक लापरवाही का यह आलम है कि कई शिकायतों के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

स्टेट हाईवे-18 को 'फोर-लेन' करने की उठ रही माँग---एनएच-146 और स्टेट हाईवे-18 पर बीते एक साल में 100 से अधिक सड़क हादसे दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 25 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसी वजह से स्थानीय लोग अब इसे "खूनी सड़क" कहने लगे हैं।सलामतपुर, सांची, दीवानगंज और बेरखेड़ी क्षेत्र के रहवासियों ने इस खूनी मार्ग को फोर-लेन बनाने की माँग शासन-प्रशासन से की है। निरंतर हो रहे हादसों की वजह से पुलिस विभाग भी परेशानी झेल रहा है, क्योंकि सीमित पुलिस बल का बड़ा हिस्सा एक्सीडेंटल इमरजेंसी में ही व्यस्त रहता है।

जनाक्रोश और स्थानीय प्रतिनिधियों की आवाज

​"वीआईपी मूवमेंट के बावजूद समस्या जस की तस"

"भोपाल-विदिशा स्टेट 18 हाईवे के इस मुख्य मार्ग से वीआईपी अधिकारियों का आवागमन रहता है। पूर्व में कई बार विभाग को लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आए दिन लोग नहर में गिर रहे हैं।"

रघुवीर सिंह मीणा, सरपंच, ग्राम पंचायत रातातलाई

"विभागीय लापरवाही पड़ रही भारी"

"पुलिया सालों से बिना सुरक्षा रेलिंग के पड़ी है। पिछले हफ्ते ही एक कार नहर में गिरी थी। विभाग को रेलिंग की ऊँचाई कम से कम 3 से 4 फीट करनी चाहिए, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।"

अशोक त्रिपाठी, समाजसेवी, रातातलाई सलामतपुर

​"माँग न मानी गई तो करेंगे आंदोलन"

"आधे-अधूरे निर्माण के कारण रोज़ वाहन चालक अपने हाथ-पैर तुड़वा रहे हैं। यदि शीघ्र ही पुलिया की मरम्मत और सुरक्षा दीवार का पुनः निर्माण नहीं किया गया, तो स्थानीय नागरिक उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।"

 हमजा जाफरी, पूर्व उपसरपंच, सुनारी

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28