-10 गांवों के हज़ारों ग्रामीण रोज़ जान जोखिम में डालकर कर रहे हैं रेलवे लाइन क्रॉस

-बड़ी अनहोनी के इंतजार में आँखे बंद कर बैठे हैं ज़िम्मेदार अधिकारी,शासन प्रशासन भी नही दे रहा ध्यान

अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

जिले के अंबाडी-छपरई मार्ग पर स्थित रेलवे गेट कुछ साल पहले बंद करके नीचे से अंडर पुलिया बनाई गई थी, लेकिन यह पुलिया अब ग्रामीणों के लिए जोखिम का सबब बन गई है। बारिश के मौसम में पानी भर जाने के कारण यह मार्ग बंद हो जाता है, जिससे आसपास के दर्जनों गांवों के लोग रोजाना जान जोखिम में डालकर रेल की पटरी पार करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मोटरसाइकिल  को दो लोग उठाकर रेल की पटरी के दूसरी तरफ ले जाना पड़ता है। यही मार्ग स्कूल जाने वाले बच्चे और किसान रोजाना इस्तेमाल करते हैं। इस जोखिम भरे सफर के दौरान किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं, कई बार ग्रामीणों ने जिम्मेदार विभागों को आवेदन और ज्ञापन भेजकर समस्या का समाधान करने का अनुरोध किया, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और रेलवे विभाग की उदासीनता उनके जीवन के लिए खतरे की घंटी बन गई है।

ज़िम्मेदार अधिकारी नही दे रहे हैं ध्यान--हम रोज अपनी जान को खतरे में डालकर बच्चों को स्कूल भेजते हैं और अपने खेतों तक पहुंचते हैं। अगर किसी हादसे के बाद ही जिम्मेदार जागेंगे, तो तब बहुत देर हो चुकी होगी,” एक ग्रामीण ने गुस्से और चिंता के साथ बताया। अंबाडी-छपरई मार्ग की यह स्थिति न सिर्फ ग्रामीणों की जिंदगी को खतरे में डाल रही है, बल्कि यह सरकार और रेलवे विभाग की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर रही है। अब सवाल यह है कि क्या अधिकारियों की आंखें तब खुलेगी जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा?

10 गांवों के हज़ारों ग्रामीण रोज़ डालते हैं जान जोखिम में--सांची जनपद के छपराई गांव रेलवे की पुलिया में बरसात के समय पानी भरा होने के कारण लगभग 10 गांवों के स्कूली बच्चों सहित किसानों को जान जोखिम में डालकर ट्रेनों की पटरी से होकर गुजरने के लिए मजबूर होना पड़ता है। पुलिया में पानी भरा हुआ है। मरीजों को भी इसी मुसीबत से दो चार होना पड़ रहा है।मुसीबत झेल रहे लोगों का कहना है कि 4 साल से विधायक मंत्री और रेल अफसरों से मिल रहे हैं। लिखित शिकायत दे रहे हैं। कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पहले यहां पर रेलवे गेट हुआ करता था। वहां से आसानी से निकल जाते थे। और खेती किसानी करने वाले ट्रैक्टर इस पार से उस पार चले जाते थे। अब आलम यह है कि रेलवे ने बरसों पुराने गेट को बंद कर दिया है। जिससे खेती किसानी करने वाले किसानों सहित स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हैं। बारिश के समय पर खाद बीज ले जाने के लिए ट्रैक्टर पटरी के उस पार नहीं जा पाता है। जिससे मजदूरों द्वारा खाद बीज कंधे पर रखकर भेजा जाता है। जिससे खाद बीज से ज्यादा पैसा मजदूरों को देना पड़ता है। रेलवे की अंडर पुलिया में बरसात में 4 महीने तक पानी भरा रहता है।और इसके अलावा कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं है। जिससे मजबूरी में रेलवे लाइन क्रास करके निकलना पड़ता है।

इनका कहना है।

हमको इस गांव से दूसरी तरफ जाने के लिए प्रतिदिन इन रेलवे लाइनों को पार करके जाना पड़ता है। बारिश होने की वजह से रेलवे पुलिया में भी पानी भर गया है। इसके अलावा जाने का कोई और रास्ता नही है। कई बार हम ट्रेन की चपेट में आने से भी बच चुके हैं।

बाबूलाल, स्थानीय ग्रामीण।

हम प्रतिदिन 7 किलोमीटर चलकर जाते हैं। रास्ते में हमें रेलवे लाइन क्रास करके जाना पड़ता है। जिसमें बहुत खतरा रहता है। लेकिन हमें काम से जाना पड़ता है इसलिए हम रोज़ खतरा मोल लेते हैं।

गणेशराम, ग्रामीण।

 में स्कूल में पड़ती हूं। स्कूल खुलने के बाद मुझे गांव से 7 किलोमीटर दूर स्कूल पड़ने जाता हूं। मुझे प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार करना पड़ती हैं। सरकार ने अंडरब्रिज बनाया है लेकिन उसमें भी पानी भरा रहता है।

रागनी, छात्रा।

8 से 10 गांवों के हज़ारों ग्रामीणों को प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन क्रास करके दूसरी और जाना पड़ता है। और तो और हमें अपने वाहन भी रेलवे की पटरियों और पानी भरे हुए पुलिया से ले जाना पड़ते हैं। अगर गांव में कोई बीमार हो जाता है तो बड़ी समस्या उत्पन्न हो जाती है। शासन प्रशासन हमारी समस्या का कोई भी समाधान नही कर रहा है।

रमेश प्रजापति, स्थानीय किसान

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28