कीचड़ में फंसी सेमरी टोला की जिंदगी: एवरेस्ट विजेता के गांव में आज़ादी के 80 साल बाद भी सड़क का अकाल
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
मध्यप्रदेश के रायसेन जिले का सांची विकासखंड आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। यहां की सरार पंचायत के अंतर्गत आने वाला सेमरी टोला गांव प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। आज़ादी के कई दशकों बाद भी गांव के लोग महज डेढ़ किलोमीटर की पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। बारिश का मौसम आते ही यह रास्ता गहरे कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी तरह ठप पड़ जाती है।
हाथों में तिरंगा, पैरों में कीचड़: स्वतंत्रता दिवस पर दिखी गांव की बेबसी--हाल ही में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गांव की बदहाली की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई। जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, तब सेमरी टोला के मासूम स्कूली बच्चे हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे कीचड़ से भरे रास्ते पर प्रभात फेरी निकालने को मजबूर थे। बच्चों का कीचड़ में संघर्ष करते हुए यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
माउंट एवरेस्ट पर लहराया तिरंगा, पर अपने ही गांव में राह तलाशती बेटी--इस गांव की विडंबना यह है कि यहीं की रहने वाली बेटी अंजना यादव ने हाल ही में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया था। अंजना की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर सांसदों, विधायकों और मंत्रियों ने बधाइयों के पुल बांधे थे। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि जिस गांव ने देश को गौरवान्वित करने वाली पर्वतारोही दी, वहां आज तक एक चलने लायक सड़क भी नहीं बन सकी। गांव में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में युवाओं का भविष्य इसी कीचड़ में धंस रहा है।
आपात स्थिति में टूट जाता है संपर्क, एम्बुलेंस तक पहुंचने में लाचारी---बारिश के दिनों में सेमरी टोला पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाता है। दलदली रास्ते के कारण कोई भी दोपहिया या चार पहिया वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता। बीमार मरीजों या गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के लिए जननी एक्सप्रेस (108 एम्बुलेंस) गांव तक नहीं आ पाती।आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों को मरीजों को खाट या डोली पर लादकर कीचड़ के बीच पैदल ही मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।
निजी जमीन का पेच और व्यवस्था की लाचारी--सड़क निर्माण न होने के सवाल पर पंचायत के सरपंच नरेश चौधरी का कहना है कि सड़क के लिए प्रस्तावित जमीन निजी भूमि की श्रेणी में आती है। जमीन संबंधी इस तकनीकी और कानूनी अड़चन के कारण निर्माण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिल पा रही है।हालांकि, सरपंच के इस तर्क के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि यदि जमीन की समस्या का समाधान प्रशासन नहीं निकालेगा, तो आम ग्रामीण कहां जाएं? क्या कानूनी प्रक्रियाओं के पेच में ग्रामीणों को हर साल इसी तरह दलदल में जिंदगी गुजारने के लिए छोड़ दिया जाएगा? अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे जल्द से जल्द कोई कानूनी या वैकल्पिक मार्ग तलाश कर गांव को सड़क सुविधा से जोड़ें।






























MP में सेवा संकल्प अभियान का बड़ा प्लान तैयार, अधिकारियों को जिलावार जिम्मेदारियां सौंपी गईं
‘हनुमान अंश’ की विदेशों में भी धूम, नॉर्थ अमेरिका में रिलीज से पहले ही करीब 1 करोड़ की कमाई
खुदरा खरीद से सोने की कीमतों में तेजी, तीन दिन की गिरावट का सिलसिला टूटा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को लेकर रखी सरकार की सोच, समृद्धि पर दिया जोर
बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी खबर, 11 सितंबर से लगातार तीन दिन बैंकिंग सेवाएं रहेंगी प्रभावित
नाबालिग लड़की के उत्पीड़न पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश
सेबी प्रमुख का बड़ा बयान, एआई से बदल सकती है शेयर बाजारों के कामकाज की तस्वीर
‘टकराव नहीं, सहयोग जरूरी’, अंतरराष्ट्रीय मंच से PM मोदी ने दिया दुनिया को बड़ा संदेश
सरकारी जमीन पर चला बुलडोजर, भोपाल में 15 करोड़ की जमीन कराई अतिक्रमण मुक्त