-8 से 10 गांवों के हज़ारों ग्रामीण परेशान, रेल पटरी से गुजरने को मजबूर, कई जानें जा चुकीं

-शिकायतों के बाद भी ज़िम्मेदार अधिकारी नही दे रहे ध्यान

अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)

जिले के सांची विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गीदगढ़ में स्वीकृत ग्रेवल सड़क निर्माण कार्य दो साल बाद भी अधूरा पड़ा है। गीदगढ़ से महुआखेड़ा तक लगभग 2 किलोमीटर लंबी इस सड़क का भूमि पूजन क्षेत्रीय विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी द्वारा करीब दो वर्ष पहले किया गया था। सड़क का निर्माण आरईएस (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) विभाग द्वारा लगभग 62 लाख रुपये की लागत से किया जाना था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। जिसकी वजह से हज़ारों ग्रामीण परेशान हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण खस्ताहाल सड़क की वजह से जान जोखिम में डालकर रेल्वे पटरियां क्रॉस कर के दूसरी और जा रहे हैं। इसी जद्दोजहद में कई ग्रामीणों की जान ट्रेन की चपेट में आने से चली भी गई है। लेकिन ज़िम्मेदार अधिकारी कुंभकर्ण की नींद में सोए हुए हैं। 

सड़क नहीं बनने से क्षेत्र के 8 से 10 गांवों के हजारों ग्रामीणों परेशान--सड़क नही बनने से आठ से दस गांवों के हज़ारों ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब रास्ता पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है और लोगों का निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। मजबूरी में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन के ऊपर से आवाजाही करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कीचड़ से बचने के लिए रेलवे पटरी से गुजरना उनकी मजबूरी बन गया है, लेकिन यह रास्ता बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। महुआखेड़ा की बुजुर्ग शांति बाई बताती हैं कि सड़क नहीं होने की वजह से उनका परिवार भी इस त्रासदी का शिकार हो चुका है। उनके अनुसार, कीचड़ से बचने के लिए उनके बहू, बेटा, पोती और पोता रेलवे लाइन से गुजर रहे थे, तभी दोनों ओर से ट्रेन आ गई और चारों ट्रेन की चपेट में आ गए, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि इस तरह की घटनाओं में पहले भी कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर नहीं जा रहा है।

जननी एक्सप्रेस भी गांव तक नही पहुंच पा रही, गर्भवती महिला उठा रही हैं भारी जोखिम--सड़क नहीं होने से क्षेत्र में जननी एक्सप्रेस जैसी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं भी गांव तक नहीं पहुंच पातीं, जिससे गर्भवती महिलाओं और मरीजों को भारी जोखिम उठाना पड़ता है। वहीं स्कूली बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि बरसात में स्कूल वाहन तक गांव तक नहीं पहुंच पाता। सवाल यह उठता है कि जब सड़क के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है और भूमि पूजन भी हो गया, तो आखिर दो साल बाद भी निर्माण कार्य क्यों शुरू नहीं हुआ? क्या विभागीय लापरवाही और ठेकेदार की उदासीनता के बीच ग्रामीणों की जान की कोई कीमत नहीं है? ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके।

इनका कहना है।

इस 62 लाख रुपये लागत की सड़क निर्माण को लेकर आरईएस विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जबकि पंचायत द्वारा 2 बार सीमांकन करा के जगह भी उपलब्ध कराई गई है। ठेकेदार आधा अधूरा काम छोड़कर भाग गया है। अब वह मेरा फोन भी नही उठा रहा है।

लीलाकृष्ण अहिरवार, ग्राम पंचायत गीदगढ़। 

गीदगढ़ गांव से लेकर महुआखेड़ा तक लगभग 2 किलोमीटर का लंबा रास्ता है। कच्ची सड़क की वजह से 8 से 10 गांव के हजारों ग्रामीण हद से ज्यादा परेशान हो रहे हैं। स्थानीय विधायक के द्वारा 2 साल पहले ग्रेवल रोड का भूमि पूजन किया था इसके बाद ठेकेदार भी आया था। लेकिन उसने कोई काम नहीं किया। स्कूली बच्चों के साथी किसान और ग्रामीण काफी परेशान हो रहे हैं।शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

हरिराम अहिरवार, ग्रामीण महुआखेड़ा गांव।

ग्रामीणों ने सड़क की समस्या को लेकर सांची विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ प्रभुराम चौधरी से भी शिकायत की है। इसके अलावा रायसेन तहसील में भी शिकायत के माध्यम से अधिकारियों को अवगत कराया गया है। लेकिन समस्या का समाधान नही हुआ।

खेमचंद मीणा, स्थानीय ग्रामीण

न्यूज़ सोर्स : अदनान खान एडिटर इन चीफ IND28