शिक्षक रंक को राजा और धूल को सोना बना सकता है: डॉ. खत्री
-सांची विश्वविद्यालय में सेवा पखवाड़े पर विशेष चर्चा
-हम जागृत होंगे तो राष्ट्र जागृत होगा- प्रो. मेहता
-शिक्षक छात्रों को ज़िम्मेदार नागरिक बनाता है- डॉ. तीखे
-सेवा पखवाड़े पर पौधारोपण भी किया गया
अदनान खान सलामतपुर रायसेन। (एडिटर इन चीफ IND28 हर खबर पर पैनी नज़र)
कस्बे में स्तिथ साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में आज सेवा पखवाड़े के अंतर्गत विकसित भारत में शिक्षक की भूमिका पर परिचर्चा आयोजित की गई। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस सेवा पखवाड़े के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा में मुख्य अतिथि के रूप में योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र बाबू खत्री ने कहा कि शिक्षक को त्यागी होना होगा जिससे वो छात्रों के साथ जुड़ सके। उन्होंने कहा कि शिक्षक को सबसे पहले आर्दश स्थापित करते हुए स्वयं को प्रस्तुत करना होगा तभी वो एक ऐसा छात्र तैयार कर सकता है जो विकसित भारत का निर्माण कर सके। डॉ. खत्री ने कहा कि त्याग के माध्यम से ‘शिक्षक रंक को राजा बना सकता है’ जैसा कि चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को बनाया था। डॉ. खत्री ने कहा कि ‘शिक्षक धूल को भी सोने के कण बना सकता है’। उन्होंने कहा कि यदि विकसित भारत की सोच भारतीय परंपराओं पर आधारित होंगी तो ही विकसित भारत बन सकता है।परिचर्चा में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने विषय पर अपने-अपने विचार रखे। विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता और अंग्रेज़ी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. नवीन मेहता ने कहा कि यदि हम जागृत होंगे तो राष्ट्र जागृत होगा, स्वयं को विकसित करें राष्ट्र स्वयं ही विकसित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्राचीन ज्ञान-विज्ञान चरम पर है, योग में भारत विश्वगुरू है, ये सब विकसित भारत के प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक महाशक्ति बन गया है और गुलाम मानसिकता दूर हो गई है। उन्होंने छात्रों से कहा कि ज्ञान जहां से मिले उन्हें लेना चाहिए।
योग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. शाम गनपत तीखे ने कहा कि शिक्षक छात्रों को ज़िम्मेदार नागरिक बनाता है। बौद्ध अध्ययन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. रमेश रोहित ने कहा कि शिक्षक और छात्रों को काया, वचन और मन को साधना चाहिए जिससे विकसित भारत का लक्ष्य पूरा हो सके। सहायक लाइब्रेरियन डॉ. अमित ताम्रकार ने कहा कि आज ज्ञान की सबसे अधिक आवश्यकता है और ज्ञान का माध्यम गुरू है। परिचर्चा में छात्र-छात्राओं ने अपने-अपने विचार रखे। योग विभाग की छात्रा मनीषा ने कहा कि गुरू अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। पीएचडी भारतीय चित्रकला के शोधार्थी अंकित पाण्डेय ने कहा कि ब्रह्म ही शिक्षक की तरह गुरू रूप में सभी को सिखाते हैं। सेवा पखवाड़े के तहत आज विश्वविद्यालय में पौधारोपण भी किया गया। कुलसचिव विवेक पाण्डेय और अधिष्ठाता प्रो. नवीन मेहता के साथ मिलकर समस्त अधिकारियों-कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में पौधे लगाए। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने सेवा पखवाड़े के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए सभी को बधाई दी। सेवा पखवाड़े के तहत लगातार 15 दिनों तक विश्वविद्यालय में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
